ट्विशा शर्मा मौत के मामले में आज कोर्ट बड़ा फैसला ले सकती है. बता दें कि कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को रद्द किया है. साथ ही निचली अदालत पर कई अहम तथ्यों को इग्नोर करने का भी आरोप लगाया गया है. कोर्ट का कहना हैं कि निचली अदालत ने मामले को गंभीर नहीं लिया है. सबूतों की जांच भी सही तरीके से नहीं की गई है.
इसी बीच एक और खबर सामने आ रही है. दरअसल, आज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया जा सकता है. गुरुवार 28 मई के दिन CBI की टीम उनके घर गई है, जिसके बाद से उनकी गिरफ्तारी की बातें सामने आ रही है. मामले में CBI अब सतर्क रूप से कार्य कर रही है. भोपाल में CBI ने इन्वेस्टिगेशन कैंप ऑफिस बनाने के लिए भोपाल पुलिस कमिश्नरेट को पत्र लिखा है. CBI उस ऑफिस में सभी अहम दस्तावेज और सबूतों को सुरक्षित रखना चाहती है.
कोर्ट में मामले की सुनवाई के समय में कई बातों को उठाया गया, जिसमें सबसे पहले निचली अदालत के अहम मुद्दों को इग्नोर करने की बात की गई है.
CBI और सरकार ने कहा हैं कि ट्विशा के शरीर पर लगने वाली चोटों को साधारण बताया गया था. जो कि ब्लंट फोर्स की वजह से लगी थी.
ट्विशा शर्मा के माता पिता की तरफ से लाए गए वकील ने साफ तौर पर कहा कि डिजिटल सिग्नेचर टेक्नोलॉजी, साइबर फॉरेंसिक, और कई क्राइम सीन में छेड़छाड़ हुई है.
गिरिबाला के पास में घटना के समय के कई फोटो मौजूद है. उसने सबूतों के साथ में छेड़छाड़ करने के इरादे से उन सभी को सोशल मीडिया पर डाल दिया. उसनें इन्हें वीडियो रिकॉर्डिंग की छोटी-छोटी क्लिप में शेयर किया गया है.
अग्रिम जमात के न मिलने के बाद गिरीबाला जांच एजेंसी की जांच करने में मदद नहीं कर रही थी. मायके पक्ष के रेखा रानी शर्मा, हर्षित और नवनिधि शर्मा से लिए गए बयान से स्पष्ट होता हैं कि गिरीबाला और उसके बेटे ने ट्विशा को प्रताड़ित किया था.
ट्विशा शर्मा का जबरदस्ती गर्भपात करवाया गया था, जिसके बाद गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को अपने साथ रहने की इजाजत देने की बात बोली थी.
वियतनाम से वापस आने के बाद में गिरीबाला और बेटे ने बहू को सारे शेयर्स उनके नाम ट्रांसफर करवाने बोला था.
ट्विशा का पास के डॉक्टर की बजाए एम्स ले जाया गया.
सीसीटीवी फुटेज से भी छेड़छाड़ की गई है.
निकटतम पुलिस स्टेशन में मामले की सूचना नहीं दी गई.
निचली अदालत ने बचाव पक्ष के दस्तावेजों पर ज्यादा भरोसा जताया और गिरीबाला सिंह के खिलाफ मौजूद सामग्री पर विचार नहीं किया है.
निचली अदालत ने गिरीबाला के खिलाफ में मौजूद चैट पर ध्यान नहीं दिया और केवल 24 घंटे की विवेचना पर गिरिबाला को जमानत दे दी गई.
