Lucknow: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (UP ATS) की कस्टडी रिमांड में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध आतंकी शाहबाज सिद्दीकी ने बेहद चौंकाने वाले और खौफनाक खुलासे किए हैं. ATS की कड़ी पूछताछ में आरोपी शाहबाज ने कुबूल किया है कि वह भारत में एक बड़े ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमले को अंजाम देने की पूरी तैयारी में था. बस उसको पाकिस्तानी जैश के आतंकी के इशारे का इंतजार था. इससे संबंधित एटीएस को आरोपी के मोबाइल से भी अहम सुबूत मिले हैं.
चैट और रिकॉर्डिंग बरामद
आरोपी के मोबाइल से पाकिस्तानी आतंकियों के साथ बातचीत के ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिलीटेड चैट के पुख्ता सबूत मिले हैं. पूछताछ में सामने आया कि शाहबाज पुलवामा हमले पर खुश था और सेना की सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध कर रहा था; एटीएस अब उसके अन्य साथियों की तलाश में जुटी है.
पाक जैश कमांडर के अंतिम इशारे का इंतजार….
एटीएस की पूछताछ के दौरान शाहबाज ने बताया कि वह खुद देश के भीतर आत्मघाती हमला करने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हो चुका था. वह बस सीमा पार बैठे अपने पाकिस्तानी जैश कमांडर के अंतिम इशारे का इंतजार कर रहा था. पाकिस्तानी हैंडलर ने उसे भरोसा दिया था कि सही समय आने पर उसे उस सटीक जगह (लोकेशन) के बारे में बताया जाएगा, जहां उसे इस आत्मघाती हमले को अंजाम देना था. पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा शाहबाज को लगातार कट्टरपंथी और भड़काऊ वीडियो भेजकर इस हमले के लिए उकसाया जा रहा था.
मोबाइल से संवेदनशील और पुख्ता सबूत
एटीएस को आरोपी शाहबाज के पास से बरामद मोबाइल फोन से बेहद संवेदनशील और पुख्ता सबूत मिले हैं. सूत्रों के मुताबिक, मोबाइल डेटा खंगालने पर जैश के आतंकियों से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और चैट बरामद हुई है. इस चैट और ऑडियो में शाहबाज 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले को सही ठहरा रहा है, जबकि भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक को गलत बता रहा है. इतना ही नहीं, उसने भारत में पूर्व में हुई अन्य आतंकी घटनाओं को लेकर भी सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की थी.
गौरतलब है कि सोशल मीडिया से मिले इनपुट के आधार पर एटीएस ने बीते 18 मई को कासगंज के रहने वाले शाहबाज सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था, जो पुलवामा हमले से जुड़े जैश के आतंकियों के सीधे संपर्क में था. दो दिन पहले ही कोर्ट से उसकी कस्टडी रिमांड मंजूर हुई है. जांच एजेंसी को अब यह प्रबल आशंका है कि शाहबाज के इस खतरनाक नेटवर्क से भारत के कई अन्य राज्यों के लोग भी जुड़े हो सकते हैं. इस स्लीपर सेल और मददगारों के पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए एटीएस की टीमें लगातार जद्दोजहद और छापेमारी में जुटी हुई हैं.
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