Rahul gandhi kota visit: कोटा में छात्रों से संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि हमारा एजुकेशन सिस्टम बच्चों पर जरूरत से ज्यादा मानसिक दबाव डालता है और उनके सपनों को सिर्फ डॉक्टर-इंजीनियर जैसे सीमित विकल्पों में बांध देता है.

Rahul gandhi kota visit: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी राजस्थान के कोटा शहर पहुंचे. वहां उन्होंने पढ़ाई कर रहे छात्रों से एक बेहद खास मुलाकात की. उन्होंने देश की पढ़ाई लिखाई के तरीके, बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव और करियर के कम रास्तों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए. राहुल गांधी ने शुरुआत में ही साफ कर दिया कि उनकी यह मुलाकात कोई सियासी रैली नहीं है. इसका राजनीति या चुनाव से कोई लेना देना नहीं है. यह पूरा कार्यक्रम सिर्फ और सिर्फ छात्रों के भविष्य और उनकी मुश्किलों पर बात करने के लिए रखा गया है.
राहुल गांधी ने छात्रों के सामने अपनी पुरानी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि जब वह कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल चल रहे थे, तो रास्ते में उन्हें लाखों नौजवान मिले. वह जब भी किसी बच्चे से उसके भविष्य की पसंद पूछते थे, तो उन्हें घूम फिरकर सिर्फ पांच जवाब ही मिलते थे. हर कोई डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, आईएएस या फौज में जाना चाहता था. राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें कभी छठा जवाब सुनने को ही नहीं मिला. इस बात ने उन्हें अंदर से बहुत ज्यादा परेशान कर दिया कि हमारे देश में बच्चों के सामने इतने कम विकल्प क्यों हैं.
उन्होंने देश के एजुकेशन सिस्टम पर खुलकर अपनी बात रखी. राहुल गांधी ने कहा कि हमारी पढ़ाई का सबसे बड़ा दोष यही है कि यह बच्चों को अपनी पसंद के सपने देखने की आजादी नहीं देता. यह व्यवस्था छात्रों की व्यक्तिगत पसंद और उनकी कला का सम्मान करना नहीं जानती है. हर बच्चे की अपनी एक अलग काबिलियत होती है, लेकिन हमारा सिस्टम सबको एक ही भेड़चाल में चलने के लिए मजबूर करता है. इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर सरकारी स्कूल कॉलेज इतने कमजोर क्यों होते जा रहे हैं और प्राइवेट पढ़ाई इतनी महंगी क्यों हो गई है.
छात्रों के मानसिक तनाव पर बोलते हुए राहुल गांधी काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि आज की पढ़ाई का ढांचा बच्चों की मदद करने के बजाय उन पर जरूरत से ज्यादा बोझ डाल रहा है. यह सिस्टम छात्रों को हर दिन डराता है, दबाता है और उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देता है. लाखों परिवारों के लिए अपने बच्चों को पढ़ाना अब एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बनता जा रहा है. कोटा जैसे शहर में जहां देश भर से लाखों बच्चे आकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, वहां का माहौल सच में बहुत तनावपूर्ण हो जाता है.
आखिर में राहुल गांधी ने कोटा में होने वाली छात्रों की खुदकुशी के मुद्दे पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सरकार, समाज और कोचिंग संस्थानों को मिलकर एक ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करना चाहिए, जहां कोई भी बच्चा तनाव में आकर अपनी जान देने के बारे में सोचे तक नहीं. हमें अपने बच्चों को ऐसा हौसला देना होगा कि परीक्षा ही जिंदगी का आखिरी रास्ता नहीं होती है. इस पूरे संवाद का सबसे बड़ा मकसद यही था कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की कमियों को लेकर देश के भीतर एक नई और जरूरी बहस शुरू हो सके.
