राम मंदिर चढ़ावे में हुई हेराफेरी की जांच अब अपने अंतिम चरण में है. SIT के चीफ विजय विश्वास पंत की अगुआई में रिपोर्ट को तैयार कर लिया गया है. हालांकि, इसी बीच एक और खबर सामने आ रही है. दरअसल, मंदिर के ट्रस्टियों द्वारा रोजाना के निर्णय के अधिकारों को अब फ्रिज कर दिया गया है. यह फैसला DM ने लिया है.
क्या है राम मंदिर मामला?
दरअसल, राम मंदिर में देश-विदेश के श्रदालुओं का चंदा आता है. दान पेटी में करोड़ों रुपये कैश और बहुमूल्य समाग्री होती हैं, लेकिन मंदिर के ही कुछ लोगों ने इसमें करोड़ों का खपला किया हैं. ये कोई आम खपला नहीं बल्कि 200 करोड़ से ज्यादा का माना जा रहा है.
घोटाले का मामला सामने आने के बाद में SIT का गठन किया गया. इसमें 2000 घंटे से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई और 100 से भी अधिक लोगों से पूछताछ की गई.
पूरा काम बड़े ही क्रम में होता था. दरअसल, जब भी पैसों और गहनों की जांच की जाती थी तो उस समय सीसीटीवी को बंद कर दिया जाता था. कई बार फुटेज तक को डिलीट कर दिया जाता था.
लोगों की कार्रवाई अंतिम चरण पर
जांच में कई लोगों को घेरे में लिया गया है. अभी तक 2 करोड़ कैश को ही बरामद ही किया गया है. वहीं, एक कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपये बरामद हुए है. 40 कर्मचारियों को अभी तक अपने पद से हटाया है. वहीं, 150 से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है.
SIT जांच के चीफ विजय विश्वास पंत की जांच बनकर तैयार हो चुकी है. 150 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजी गई है.
DM ने लिया फैसला
रिपोर्ट के अनुसार, DM ने इसी बीच एक बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने ट्रस्टियों के अधिकार को फ्रीज कर दिया है. मंदिर के अधिकार को भी अपने हाथ में ले लिया है. नई व्यवस्था में अब दरी को बिछाकर नोटों की गिनती की जाएगी. साथ ही वीडियोग्राफी भी की जाएगी.
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