उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ा फैसला लिया है. यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार बन कर उभरा है. दरअसल, सीएम धामी ने ‘उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’ को प्रदेश में लागू कर दिया है. इस नियम में मदरसा शिक्षा व्यवस्था और गैर सरकारी अरबी-फारसी मदरसे को समाप्त कर दिया गया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को इसकी जानकारी दी है.
सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों तक पहुंचाई बात
सीएम धामी ने लिखा कि ‘प्रिय प्रदेशवासियों, आज से ‘उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम” प्रभावी हो गया है. इसके साथ ही मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम एवं गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम समाप्त हो गए हैं.आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है जो आधुनिक, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण, जवाबदेह और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर आधारित हो. नई व्यवस्था सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए समान एवं पारदर्शी मान्यता प्रणाली सुनिश्चित करेगी.हमारा संकल्प स्पष्ट है कि प्रदेश का नौनिहाल आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल और भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाए. इसी लक्ष्य के साथ हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं.’
क्या है नए नियम
दरअसल, पहले अल्पसंख्यक से जुड़ी सुविधाएं केवल मुस्लिमों के शिक्षा संस्थानों को मिलती थी. नए नियम में यह सुविधाएं सिख, मुस्लिम, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी सभी अल्पसंख्यक समुदायों की दी जाएगी.
मदरसा बोर्ड अब पूरी तरीके से समाप्त हो चुका है. अब राज्य के सभी अल्पसंख्यक स्कूल और मदरसे उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंदर काम करेंगे.
अगर ऐसे संस्थान चलते हैं, तो उन्हें पहले उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से मान्यता लेनी होगी.
हालांकि, अल्पसंख्यक को अपने धर्म की शिक्षा देने का अधिकार अब भी है पर उन्हें धार्मिक के साथ विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कौशल विकास, गणित और कंप्यूटर की पढ़ाई करवाना भी जरूरी होगा. साथ ही इन स्कूलों पर NCERT का सिलेबस भी अनिवार्य होगा.
सभी नए संस्थानों और अभी के समय चल रहे शैक्षिक संस्थानों को सरकारी पोर्टल पर आवेदन करना होगा. हर 3 तीन साल में उसका नवीनीकरण भी कराना जरूरी होगा.
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