दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक या पारिवारिक विवाद में पति-पत्नी के द्वारा एक दूसरे को बदनाम करने के लिए निजी फोटो और वीडियो का इस्तेमाल करने पर कड़ा रूख अपनाया है. दरअसल, यह मामला 2022 में हुई शादी से उठा है. जहां कोर्ट में चल रहे एक मामले में पति ने पत्नी को बदनाम करने की कोशिश की.
दरअसल, दंपति की 2022 में शादी हुई थी. हालांकि, शादी ज्यादा साल तक टिक नहीं पाई. पत्नी ने एक साल बाद ही पति और उसके परिवार पर घरेलू हिंसा का केस कर दिया. केस करने के बाद में पति ने पत्नी से तलाक लेने की अर्जी दाखिल कर दी. हालांकि, पति ने तलाक के लिए अर्जी दाखिल करते समय उसकी निजी फोटों को भी कोर्ट में जमा करवा दिया.
पति की इस हरकत के बाद में पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. पत्नी ने कोर्ट में कहा कि उसकी निजी तस्वीरें बिना प्ररमिशन के कोर्ट में देना निजता का उल्लंघन है.
मामले के बाद में कोर्ट ने दोनों की ही फटकार लगाई. दरअसल, पति से बदला लेने के लिए पत्नी ने भी कुछ सामग्री जमा करवाई थी. इसी कारण से कोर्ट ने दोनों को चेतावनी देते हुए कहा कि केस जीतने के लिए किसी की निजी जिंदगी, साथ ही उसके सम्मान के साथ में खिलवाड़ नहीं किया जा सकता.
दंपति के साथ-साथ कोर्ट ने दोनों के वकीलों को डांटते हुए कहा कि केस को जीतने के लिए किसी की भी इज्जत के साथ में ऐसे खिलवाड़ करना काफी गलत है. हर व्यक्ति की निजता और गरिमा की रक्षा करना अदालत की जिम्मेदारी है.
अदालत ने दोनों पक्षों को आदेश दिया कि पति और उसके वकील पत्नी की किसी भी निजी जानकारी या तस्वीर को साझा नहीं करेंगे. महिला की पहचान को गोपनीय रखा जाए. साथ ही फैमिली कोर्ट को आदेश दिया कि महिला की तस्वीरों को रिकॉर्ड से हटाकर एक सीलबंद लिफाफे में रखा जाए.
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