भरत भूषण तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले को लेकर चिराग पासवान ने अमित शाह से मुलाकात की और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

NDA के सहयोगी दल LJP (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है और भोजपुर के बेलैटी में भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर के मामले में लोगों के गुस्से को देखते हुए, बिहार सरकार की इस मामले में अनदेखी देखते हुए, उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के सामने इस मामले को रखा और उन्होंने इस मामले की पूरी जानकारी गृह मंत्री अमित शाह को दे दी है।
भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद से परिवार और जनता इंसाफ मांग रही है। लेकिन बिहार सरकार गंभीर नहीं है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई है। इस मामले में मुख्य आरोपी जगदीशपुर के तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा हैं। उनके ऊपर हत्या की FIR दर्ज है। आरोप है कि पब्लिक के सेंटीमेंट का ख्याल ना रखते हुए, उसको दरकिनार करते हुए, बिहार सरकार ने SDPO राजेश शर्मा को गिरफ्तार कराने के बजाए, फिर से नई जिम्मेदारी दे दी। बुधवार को जारी 53 DSP के तबादला आदेश में राजेश शर्मा को मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो यानी P&SNCB में DSP बनाया गया है। इससे तो लोगों के बीच गलत मैसेज गया कि बिहार सरकार भरत तिवारी के मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है और भरत को इंसाफ मिलना मुश्किल है। बिहार सरकार भरत तिवारी को न्याय दिलाने के पक्ष में नहीं है।
भरत तिवारी के परिवार का टूटा भरोसा
भरत भूषण तिवारी के माता-पिता और लोगों की आस अब टूट रही है। इसके लिए भरत तिवारी का परिवार सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें न्याय मिले। भरत के परिवार को बिहार सरकार पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। परिवार का आरोप है कि भरत का फर्जी एनकाउंटर किया गया। भोजपुर में वकीलों ने काली पट्टी बांधकर प्रोटेस्ट किया। गांव में हर दिन लोगों का हुजूम उमड़ रहा है। लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस एक्शन नहीं दिख रहा। 15 दिन से ज्यादा हो गए, लेकिन आरोपी पुलिस वाले जेल तो गए नहीं। जिनको सस्पेंड किया था, पुलिस लाइन अटैच किया था, उनको नई पोस्टिंग मिल गई। परिवार पूछ रहा है- ये कैसा इंसाफ है?
चिराग ने की निष्पक्ष जांच की मांग
अब इसी कड़ी में NDA के मजबूत सहयोगी दल और खुद को मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग पासवान ने अमित शाह से मुलाकात करके इस पूरे मामले को उठाया है। चिराग पासवान ने खुद भी इस मामले पर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
इस केस से NDA की छवि खराब हो रही है। बिहार में दलित-महादलित वोटर के बीच गलत संदेश जा रहा है। अगर जल्द एक्शन नहीं हुआ तो इसका नुकसान चुनाव में हो सकता है। अब बहुत जल्द हो सकता है कि केंद्र इस मामले में दखल दे। क्योंकि मामला अब बिहार से निकलकर दिल्ली पहुंच गया है। जब NDA का सहयोगी ही सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, तो मामला गंभीर है। भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस में SDPO राजेश कुमार शर्मा समेत कई पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज है। लेकिन 15 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई। उल्टा ट्रांसफर करके नई पोस्टिंग दे दी गई।
इससे जनता पूछ रही है कि क्या बिहार में पुलिस को खुली छूट है? क्या एक और निर्दोष की मौत फाइलों में दब जाएगी? अब सबकी नजर अमित शाह पर है। क्या गृह मंत्रालय बिहार सरकार से रिपोर्ट मांगेगा? क्या CBI जांच होगी?
भरत के परिवार को इंसाफ मिलेगा या नहीं, ये आने वाला वक्त बताएगा। शायद चिराग पासवान के अमित शाह के मुलाकात के बाद गृह मंत्रालय बिहार के DGP से रिपोर्ट तलब कर सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब FIR दर्ज है, तो गिरफ्तारी क्यों नहीं? सस्पेंड अधिकारी को 7 दिन में नई पोस्टिंग क्यों? अगर कार्रवाई नहीं हुई तो बिहार में पुलिस-प्रशासन पर से जनता का भरोसा उठ जाएगा। आपको क्या लगता है, चिराग पासवान के दखल से भरत को न्याय मिलेगा? क्या केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करेगी?
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