भारत को दुनिया में उसकी संस्कृति के कारण जाता है. हिंदू धर्म में कई ऐसे पर्व और त्योहार होते हैं, जिन्हें लोग काफी धूम-धाम से मनाते हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ मेला इन्हीं में से एक है. माघ मेला पौष पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्री तक चलता है. इस मेले को कुंभ मेले का छोटा रूप भी माना जाता है.
शुरू हो गया माघ मेला
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर आयोजित होने वाला माघ मेला आज यानी 3 जनवरी से शुरू हो चुका है. यह मेला 44 दिनों यानी 15 फरवरी तक चलेगा. माघ मेला एक वार्षिक हिंदू धार्मिक मेला है. हर साल इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं. इस मेले को प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर आयोजित किया जाता है. लोग कुछ विशेष तिथियों पर ज्यादा स्नान करते हैं.
माघ मेले की कुछ विशेष तिथियां और कार्यक्रम
वैसे तो माघ मेला पूरे समय ही चलता है, लेकिन कुछ विशेष तिथियां यहां स्नान करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.
3 जनवरी 2026- 3 जनवरी यानी आज पौष पूर्णिमा है और इसी दिन इस मेले की शुरुआत होती है. इस दिन लोग मेले का उद्घाटन स्नान करने यहां आते हैं. इसी दिन से कल्पवास करने वाले भक्त अपनी साधना की शुरुआत करते हैं.
14 जनवरी 2026- 14 जनवरी को देश में मकर संक्रांति मनायी जाती है. इस दिन लोग यहां बड़ी संख्या में स्नान करने आते हैं. इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व होता है और बड़ी संख्या में लोग स्नान करने आते हैं. लोग यह भी मानते हैं कि इस दिन स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.
18 जनवरी 2026- इस दिन मौनी अमावस्या है. मौनी अमावस्या का दिन इस मेले का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा भीड़ वाला दिन होता है. इस दिन लोग मौन व्रत रखकर स्नान करते हैं. लोगों का मानना है कि ऐसे स्नान करना आत्म-चिंतन और पितरों को पर्पण के लिए काफी अच्छा होता है. इस दिन यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं.
23 जनवरी 2026- 23 जनवरी को बसंत पंचमी स्नान है. इस दिन लोग ज्ञान और विद्या की देवी सरस्वती के नाम पर पर्व मनाते हैं. इस दिन लोग स्नान करने के बाद में पूजा-अर्चना करेंगे.
1 फरवरी 2026- 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा स्नान है. इस दिन माघ महीने की पूर्णिमा है. लोगों की मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. 1 फरवरी को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा पाठ करने आएंगे.
15 फरवरी 2026- 15 फरवरी को यह मेला समाप्त हो जाएगा. 15 फरवरी को इस मेले में लोग महाशिवरात्रि स्नान करने आएंगे. इस दिन लोग भगवान शिव की आराधना के साथ में इस मेले में स्नान करेंगे. यह स्नान पूरे साल की साधना का समापन माना जाता है.
बसाया जाता है अस्थायी शहर

इन तिथियों के अलावा इस मेले में लोग रोज स्नान करने और पूजा पाठ करने भी आते हैं. इस मेले में उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा अस्थायी रूप से शहर भी बसाया जाता है, इस शहर में श्रद्धालुओं के लिए तंबू, पुल और शौचालय जैसी सुविधाएं होती हैं.
क्या हैं माघ मेले की रीतियां?
माघ मेले को हिंदू धर्म में एक पवित्र मेला माना जाता है. हर साल इस मेले में लाखों की संख्या में लोग स्नान करने आते हैं. यह मेला मुख्य रूप से कल्पवास और स्नान के ऊपर केंद्रित होता है.
स्नान- माघ मेले में भक्त त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर स्नान करते हैं. लोगों का मानना है कि इस मेले में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है.
कल्पवास- कल्पवास में भक्त एक महीने की कठोर साधना करते हैं और सभी कल्पवासी यानी भक्त संगम के तट पर ही रहते हैं. ये सभी कल्पवासी दिन में 3 बार स्नान करते हैं और जमीन पर ही सोते हैं. ये सभी भक्त दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन भी करते हैं. कल्पवास पौष पूर्णिमा से शुरू होने के बाद माघ पूर्णिमा तक चलता है.
क्या है माघ मेले का महत्व?

माघ मेले का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. यह मेला दुनिया के सबसे बड़े बार्षिक धार्मिक समागमों में से एक माना जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार इस मेले में स्नान करने से पापों का नाश होता है. यह मेला प्राचीन काल से चलता हुआ आ रहा है. माघ मेले को कुंभ मेले का आधार भी कहा जाता है. माघ मेला सामूहिक आस्था का प्रतीक भी है. इस मेले में कई जाति और धर्म के लोग आते हैं. इस मेले में लोग कल्पवास भी करते हैं. जिससे लोग सामान्य जीवन से अलग होकर भगवान की भक्ति में डूब जाते हैं.
कैसे पहुंचे माघ मेला?
कई लोग माघ मेले में जाने की इच्छा रखते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि यहां कैसे पहुंच सकते हैं, माघ मेला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित किया जाता है. अगर आप भी माघ मेले में आना चाहते हैं तो आप प्रयागराज में बस, ट्रेन और हवाई जहाज की मदद से पहुंच सकते हैं. सरकार के द्वारा यहां तक पहुंचने के लिए विशेष तरह से ट्रेनें चलाई जाती हैं.
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