FSSAI Red Warning Label Rules 2026: एफएसएसएआई ने अधिक चीनी, नमक और फैट वाले पैक्ड फूड पर लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिसका बड़ी कंपनियां विरोध कर रही हैं.

FSSAI Red Warning Label Rules 2026: बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स को लेकर सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है. अब जंक फूड और ज्यादा मीठे या नमकीन सामानों के पैकेट पर लाल रंग का चेतावनी निशान लगाना अनिवार्य हो सकता है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इस संबंध में एक बड़ा प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत जिन खाद्य पदार्थों में जरूरत से ज्यादा चीनी, नमक या फैट (वसा) होगा, उनके पैकेट पर लाल रंग की चेतावनी दी जाएगी. इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने में आसानी होगी और वे सही विकल्प चुन सकेंगे.
पैकेट पर साफ अक्षरों में दर्ज होगी पोषण से जुड़ी जानकारी
एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने दस्तावेज में इस योजना की विस्तृत जानकारी दी है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों के लागू होने के बाद कंपनियों को पैकेट के मुख्य हिस्से पर चेतावनी लिखनी होगी. इसमें ‘अधिक वसा’, ‘अधिक शुगर’, ‘अधिक नमक’ या ‘अत्यधिक मीठा पेय’ जैसे शब्द प्रमुखता से अंकित होंगे. इस पहल का मुख्य मकसद उपभोक्ताओं को उन प्रॉडक्ट्स की तुरंत पहचान कराना है, जो उनकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इससे लोग अनजाने में ज्यादा चीनी या नमक खाने से बच सकेंगे.
नेस्ले और कोका-कोला जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां कर रहीं विरोध
सरकार के इस कदम से खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली बड़ी कंपनियों में हड़कंप मच गया है. नेस्ले, पेप्सिको और कोका-कोला जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस नए नियम का जमकर विरोध कर रही हैं. कंपनियों का तर्क है कि पैकेट पर लाल रंग की चेतावनी छपने से ग्राहकों के मन में डर पैदा होगा. इससे उनकी बिक्री और बिजनेस पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है. यही वजह है कि कंपनियां इस नियम को टालने या इसमें ढील देने की पूरी कोशिश कर रही हैं. हालांकि, नियामक संस्था जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के मूड में है.
सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई को लगाई थी कड़ी फटकार
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें पश्चिमी देशों की तर्ज पर भारत में भी चेतावनी वाले लेबल अनिवार्य करने की मांग की गई थी. इस महीने की शुरुआत में हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने एफएसएसएआई के ढीले रवैये पर सख्त नाराजगी जताई थी. अदालत ने नियमों को लागू करने में हो रही देरी के लिए नियामक को कड़ी फटकार लगाई थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि चेतावनी लेबल से जुड़ी प्रक्रिया को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द पूरा किया जाए.
बढ़ती बीमारियों और घटती सेहत पर लगेगी लगाम
भारत में पिछले कुछ सालों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोसेस्ड और जंक फूड का अत्यधिक सेवन इसकी बड़ी वजह है. कंपनियां अक्सर अपने विज्ञापनों में इन प्रॉडक्ट्स को हेल्दी बताकर बेचती हैं. जब पैकेट पर लाल रंग का स्पष्ट निशान दिखेगा, तो लोग कोई भी सामान खरीदने से पहले दो बार जरूर सोचेंगे. इससे लोगों में सही खान-पान को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और पैकेज्ड फूड की मनमानी पर रोक लग सकेगी.
उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में बड़ा कदम
प्रस्तावित नए नियम देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकते हैं. पारदर्शी लेबलिंग व्यवस्था से कंपनियों को भी अपने प्रॉडक्ट्स में चीनी, नमक और फैट की मात्रा कम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. जब तक लोग यह नहीं जानेंगे कि वे क्या खा रहे हैं, तब तक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना मुश्किल है. उम्मीद जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद एफएसएसएआई जल्द ही इन नए दिशानिर्देशों को पूरे देश में लागू करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर देगा.
