Maulana Sajid Rashidi Statement: मौलाना साजिद रशीदी द्वारा भारत में रेप रोकने के लिए शरिया कानून लागू करने की मांग पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली और संत समाज ने साफ कहा कि देश सिर्फ संविधान से चलेगा.

Maulana Sajid Rashidi Statement: ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के एक बयान ने देश में नई बहस छेड़ दी है. साजिद रशीदी ने भारत में रेप, अपराध और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं को खत्म करने के लिए इस्लामिक कानून यानी शरिया लागू करने की मांग उठाई थी. उनके इस बयान पर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कड़ी आपत्ति जताई है. मौलाना खालिद रशीद ने स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यह केवल संविधान से ही चलेगा. उन्होंने कहा कि देश में इस तरह की मांगें उठाना पूरी तरह अनुचित है और समाज में ऐसे बयानों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
साजिद रशीदी का बयान: रेप करने वाले को जमीन में गाड़ दो
मौलाना साजिद रशीदी ने एक समाचार एजेंसी को दिए बयान में कहा था कि जब तक भारत में कठोर शरिया कानून लागू नहीं होंगे, तब तक अपराध नहीं रुक सकते. उन्होंने दावा किया कि इस्लामिक देशों में न तो रेप होते हैं और न ही भ्रष्टाचार होता है. वहां लोग शांति से रहते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति रेप जैसा जघन्य अपराध करता है, तो उसे जमीन में आधा गाड़कर पत्थरों से मारकर मौत के घाट उतार देना चाहिए. साजिद रशीदी का मानना है कि ऐसे खौफनाक दंड व्यवस्था से ही समाज को अपराध मुक्त बनाया जा सकता है.
खालिद रशीद फिरंगी महली का पलटवार: देश संविधान से ही चलेगा
साजिद रशीदी के इस विवादास्पद बयान पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने करारा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि भारत में संविधान सर्वोपरि है. हर नागरिक को अपने धर्म और पर्सनल लॉ का पालन करने का अधिकार मिला हुआ है, लेकिन यह सब संविधान के तय दायरे में ही संभव है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अदालतें भी साफ कर चुकी हैं कि पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं हो सकते. मौलाना खालिद रशीद ने जोर देकर कहा कि रेप जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए भारतीय कानून में पहले से ही बेहद सख्त प्रावधान मौजूद हैं.
आगरा की उर्स कमेटी ने किया साजिद रशीदी की मांग का समर्थन
दूसरी ओर, आगरा की खुद्दाम-ए-रोजा ताजमहल उर्स कमेटी से जुड़े ताहिरुद्दीन ताहिर ने मौलाना साजिद रशीदी के बयान का समर्थन किया है. उन्होंने सऊदी अरब का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की कानून व्यवस्था काफी सख्त है. ताहिरुद्दीन ताहिर का दावा है कि अगर भारत में भी खाड़ी देशों की तर्ज पर सख्त सजा का प्रावधान किया जाए, तो अपराधियों के मन में खौफ पैदा होगा. इससे दुष्कर्म, महिलाओं से छेड़छाड़ और चोरी जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी. उनका मानना है कि कठोर सजाएं ही अपराधियों को रोकने का एकमात्र कारगर तरीका हैं.
संत समाज का आक्रोश: संविधान से ऊपर कुछ भी स्वीकार्य नहीं
अयोध्या के प्रसिद्ध संत दिवाकराचार्य महाराज ने मौलाना साजिद रशीदी की मांग का कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि भारत की व्यवस्था पूरी तरह से भारतीय संविधान पर आधारित है और इसे किसी धार्मिक कानून से नहीं बदला जा सकता. संत दिवाकराचार्य महाराज ने कहा कि देश की संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है. किसी भी व्यक्ति या संगठन को संविधान से ऊपर उठकर धार्मिक कानून थोपने की बात करने का कोई अधिकार नहीं है. भारत की कानून प्रणाली सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करती है.
धर्मगुरुओं को समाज सुधार पर ध्यान देने की सलाह
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने धार्मिक नेताओं और मौलवियों को एक अहम सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि धर्मगुरुओं का मुख्य काम समाज में फैली बुराइयों, अशिक्षा और सामाजिक कुरीतियों को दूर करना होना चाहिए. उत्तेजक बयानबाजी करने से कानून व्यवस्था की स्थिति में कोई सुधार नहीं होता. देश की अदालतें और पुलिस व्यवस्था अपराधों पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं. इसलिए बेवजह की मांगें उठाकर माहौल खराब करने के बजाय सभी पक्षों को मिलकर समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए.
