लगतार हो रही बारिश के कारण बरेली में रामगंगा का जलस्तर बढ़ा है. जिससे नदी किनारे इलाकों में कटान की स्थिति हुई है. कटान में किसानों की 200 बीघा से ज्यादा जमीन बह गई है. ग्रामीण अब प्रशासनिक मदद और समय रहते प्रभावी इंतजाम किए जाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
मूसलाधार बारिश के बाद रामगंगा नदी में जलस्तर बढ़ गया है. जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. सोशल मीडिया पर नेपाल में आई त्रासदी के कारण रामगंगा और कछला गंगा घाट का जलस्तर बढ़ने की भ्रामक खबरें भी सामने आईं. रामगंगा नदी के किनारे स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और मछुआरों ने बढ़ते जलस्तर और कटाव से होने वाले नुकसान की जानकारी दी.
नदी किनारे रहने वाले लोगों पर खतरा
स्थानीय निवासी ससिम मुल्ला ने बताया कि बारिश के दौरान नदी में पानी तेजी से बढ़ने पर खतरे की स्थिति बनती है. तेज बहाव के कारण नदी किनारे कटान शुरू हो गया है, जिससे खेतों की जमीन और फसलें नदी में समा जाती हैं. उन्होंने बताया कि कई बार पेड़-पौधे और खेतों में खड़ी फसलें भी कटकर पानी में बह जाती हैं. नदी किनारे रहने वाले लोगों के मवेशियों पर भी खतरा बना रहता है.
मछुआरों का रोजगार हो रहा प्रभावित
स्थानीय निवासी शाहिद ने जानकारी देते हुए बताया कि जलस्तर बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों की परेशानियां भी बढ़ जाती हैं. हालांकि हाल के दिनों में पानी के स्तर में कुछ कमी देखी गई है. लेकिन नदी का तेज बहाव अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है. स्थानीय किसान फारुक ने बताया कि जलस्तर बढ़ने और बाढ़ जैसी स्थिति बनने पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. खेतों में खड़ी गेहूं, चारा और अन्य फसलें पानी में डूबकर खराब हो जाती हैं. वहीं नदी किनारे मछली पकड़कर अपना जीवनयापन करने वाले मछुआरों का रोजगार भी प्रभावित होता है
किसानों की फसल कटान में बही
आपको बता दें कि रामगंगा नदी के किनारे कटाव की स्थिति भी लगातार गंभीर बनी हुई है. स्थानीय निवासी आकाश ने बताया कि तेज कटाव के कारण कई किसानों की जमीन नदी में समा चुकी है. उनके मुताबिक लगभग करीब 200 बीघा जमीन कटाव की चपेट में आने की बात सामने आई है और पहले जिस रास्ते व बंधे से ट्रैक्टर गुजरते थे, वह भी नदी के कटाव में बह चुका है. किसानों की उड़द, धान सहित अन्य फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है.
