नोएडा मजदूर प्रदर्शन मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने FIR से पहले शांति भंग की नोटिस, कथित भड़काऊ वीडियो और व्हाट्सएप चैट की जानकारी मांगी. मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी.
उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए मजदूर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और कार्यकर्ता आकृति चौधरी की याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान हाईकोर्ट ने याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने पूछा है कि FIR से पहले शांति भंग की नोटिस दिया गया था या नहीं. साथ ही अदालत ने मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और व्हाट्सएप चैट की भी डिटेल मांगी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को सुबह 10 बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने दी हाई कोर्ट जाने की सलाह
आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा की सत्र अदालत ने आकृति चौधरी की चार में से तीन जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जबकि एक मामले में सत्र अदालत में उन्हें राहत दे दी थी. वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने भी आकृति चौधरी को सीधे जमानत देने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी. बताया जा रहा है कि याचिका में आकृति चौधरी के खिलाफ NSA को रद्द करने और उन्हें जमानत देने की गुहार लगाई गई है. जानकारी के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव इस मामले की सुनवाई कर रही है.
HC ने राज्य से किए कई सवाल
मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि यह कहां दर्ज है कि आकृति ने लोगों को बुलाया था और उन्हें पत्थर फेंकने के लिए कहा था. पीठ ने यह भी सवाल किया कि क्या ऐसा कोई सबूत है, जिससे यह पता चलता हो कि उसने प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में आग लगाने के लिए कहा था. उसके बाद जब राज्य ने कोर्ट को बताया कि आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है, तो पीठ ने टिप्पणी की इसके बाद राज्य को यह जांच करनी चाहिए थी कि गवाहों ने आकृति चौधरी का नाम विशेष रूप से कहां लिया था. इसके बाद राज्य ने गवाहों के उन बयानों पर भरोसा किया जिनसे आकृति चौधरी दोषी साबित हुईं.
कोर्ट ने समय देने से किया मना
कोर्ट के सवालों पर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वह वीडियो हासिल करके कोर्ट के सामने पेश करेगा और इसके लिए कोर्ट से समय मांगा. हालांकि पीठ ने सरकार को अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है. जानकारी के मुताबिक जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि आकृति चौधरी पहले ही पांच महीने से हिरासत में है, मैं और समय नहीं दूंगा.
