Rahul Gandhi statement: गांधी जयंती पर वोट चोरी के आरोपों और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर दिल्ली और मुंबई में भारी प्रदर्शन हुआ. राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोला, वहीं अजय राय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने हुंकार भरी.

Rahul Gandhi statement: गांधी जयंती के पावन मौके पर देश राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई में जबरदस्त राजनीतिक हलचल देखने को मिली. मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है. इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की सत्ताधारी सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए साफ कहा कि देश का युवा अब चुप नहीं बैठेगा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर चुका है. आइए जानते हैं कि इस पूरे विरोध-प्रदर्शन और राहुल गांधी के बयान के क्या मायने हैं.
अजय राय का आक्रामक नेतृत्व और जमीनी संघर्ष
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी को नई पहचान देने वाले प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस पूरे घटनाक्रम में एक बार फिर अपने तेवरों से सबका ध्यान खींचा है. अजय राय हमेशा से जनता और लोकतंत्र के अधिकारों के लिए सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ने के लिए जाने जाते हैं. उनके निडर और जुझारू नेतृत्व की वजह से ही यूपी में कार्यकर्ताओं का मनोबल चरम पर है. वोट चोरी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ अजय राय ने हर मंच पर पुरजोर आवाज उठाई है. कार्यकर्ताओं को साथ लेकर जनहित के मुद्दों पर लगातार विरोध दर्ज कराना और सरकार की गलत नीतियों की पोल खोलना अजय राय की सबसे बड़ी खासियत रही है.
राहुल गांधी का सरकार पर करारा प्रहार
दिल्ली और मुंबई में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए राहुल गांधी ने मोदी-शाह सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि देश के हजारों युवा वोट चोरी के खिलाफ पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं. लेकिन सरकार पुलिस के बल पर इन युवाओं को सड़कों पर घसीट रही है और जबरन हिरासत में ले रही है. राहुल गांधी ने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए लिखा कि लाठियों और पुलिसिया बल से भीड़ को तो रोका जा सकता है, लेकिन जनता के मन में उठ रहे वाजिब सवालों को दबाया नहीं जा सकता. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार भी जाएंगे और उन्हें इस पद पर बैठाने वाला सिस्टम भी जाएगा.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों का जमावड़ा
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली. यहां कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, वामपंथी दलों और कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता एक साथ मंच पर आए. प्रदर्शनकारी मतदाता सूची (SIR) में हुई कथित गड़बड़ियों और लाखों वोटरों के नाम काटे जाने के खिलाफ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, आप नेता सौरभ भारद्वाज और सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेताओं ने इस प्रदर्शन की अगुवाई की. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग की और दिनभर में लगभग 1,100 लोगों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया.
मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP का जोरदार प्रदर्शन
दिल्ली के साथ-साथ मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में भी सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया गया. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगने सड़कों पर उतरे. संस्था का कहना है कि यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे देश के हर छोटे-बड़े शहर तक ले जाया जाएगा. प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता साबित नहीं करता और मतदाता सूची में हुई गड़बड़ियों को ठीक नहीं करता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी.
लोकतंत्र बचाने के लिए विपक्ष की आर-पार की लड़ाई
गांधी जयंती के दिन हुए इन राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों से यह साफ हो गया है कि विपक्षी दल इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में नहीं हैं. राहुल गांधी के आक्रामक रुख और अजय राय जैसे जमीनी नेताओं के लगातार विरोध प्रदर्शन से यह लड़ाई और तेज हो गई है. विपक्ष का आरोप है कि लोकतंत्र की नींव यानी चुनाव प्रणाली को कमजोर करने की साजिश की जा रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की राजनीति में और ज्यादा तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष अब इसे लेकर सीधे जनता की अदालत में जाने की रणनीति बना रहा है.
