Noida Engineer Death Case: ग्रेटर नोएडा सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में दूसरी FIR दर्ज की गई है. फिलहाल SIT ने जांच तेज कर दी है और फरार आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है. इस हादसे को लेकर कई सवाल खडे़ हो गए हैं. पुलिस ने भी अपनी सफाई पेश की है. सूत्रों के मुताबिक पुलिस पहली सूचना से लेकर वह शत प्रतिशत अपने काम को बखूबी अंजाम दे रही थी. पढ़िए पुलिस को सूचना मिलने के बाद कैसे अधिकारी और संबंधित विभाग पहुंचा.
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक…..
- -पीआरवी को 12 बजकर 5 मिनट पर इस घटना की सूचना मिली.
- -पीआरवी 12 बजकर 12 मिनट पर मौके की जगह पर पहुंची लेकिन सूचना देने वाला मौके पर नहीं मिला. पीआरवी से मिली जानकारी के मुताबिक पीआरवी 3734 और 6355 मौके पर पहुंची थी.
- -घटनास्थल पर पहुंचने में एफएचओ और चौकी और हल्का नंबर 04 प्रभारी को फोर्स के साथ मौके पर पहुंचने में करीब 24 मिनट लगे.
- -एफएसओ को घटना वाली जगह पर पहुंचने में करीब 38 मिनट लगे. जानकारी के मुताबिक वह करीब 12 बजकर 44 मिनट पर वारदात वाली जगह पर पहुंचे.
- -फायर रेस्क्यू टेंडर करीब 12 बजकर 35 मिनट पर पहुंची.
- -लगभग 12 बजकर 55 मिनट पर सीएफओ मौके पर पहुंचे.
- -SDRF व NDRF को इसकी सूचना लगभग एक बजे के आसपास दी गई. 1 से 2 बजे के दरम्यान लगातार बातचीत होती रही.
- -मौके वाली जगह पर एसीपी करीब 1 बजकर 10 मिनट पर पहुंचे.
- -DCP ग्रेटर नोएडा लगभग 1 बजकर 35 मिनट पर पहुंचे. कार ड्राइवर को पानी से निकालने औऱ कैलाश हॉस्पिटल में भर्ती कराने तक मौजूदगी रही.
- – हाईड्रोलिक प्लेटफॉर्म लगभग 1 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 40 मिनट के आसपास पहुंची.
- -एसडीआरएफ के घटनास्थल पर लगभग 3 बजकर 55 मिनट पर पहुंची. एनडीआरएफ लगभग 5 बजकर 45 मिनट पर घटना वाली जगह पर पहुंची.
इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले में एसआईटी गठित
नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की हादसे में हुई मौत के मामले में जांच ने अब रफ्तार पकड़ ली है. SIT के गठन के बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम घटना के पांच दिन बाद मौके पर पहुंची. टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और मौके पर मौजूद हालात की बारीकी से जांच की जा रही है. फोरेंसिक विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें लापरवाही कहां-कहां हुई.
आरोप है कि गड्ढे के आसपास न तो बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था. फिलहाल पुलिस और एसआईटी टीम सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है.
कठघरे में नोएडा विकास प्राधिकरण के चार विभाग
बिल्डर परियोजना के निर्माणधीण बेसमेंट के गड्ढे में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एसआइटी ने नोएडा विकास प्राधिकरण के चार विभागों को कठघरे में खड़ा किया है. इन सभी से लिखित जवाब तलब किए गए हैं
अब तक क्या एक्शन हुआ?
इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में पहली FIR में MZ Wiztown Planners और Lotus Greens Construction के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ. MZ Wiztown Planners Private Limited के प्रमोटर और डायरेक्टर अभय कुमार को सबसे पहले गिरफ्तार किया गया. वहीं, अभी Lotus Greens के बिल्डर फरार चल रहा है. पुलिस उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है नोएडा अथॉरिटी के CEO डॉ. लोकेश एम को भी हटा दिया गया है.
