Trump board of peace gaza: ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल को लेकर वैश्विक प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है, कई देशों ने शामिल होने से मना किया है. रूस और चीन सतर्क हैं, जबकि बेलारूस ने न्योता स्वीकार किया और यूक्रेन ने विरोध जताया है.

Trump board of peace gaza: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक एक नई पहल की शुरुआत की है. इसका मकसद गाजा और अन्य युद्ध क्षेत्रों में शांति स्थापित करना और वैश्विक विवादों को सुलझाना है. ट्रंप ने इसके लिए करीब 50 राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया है, लेकिन इस पहल पर सभी प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है.
कई देश, जैसे इजरायल और सऊदी अरब, इस बोर्ड में शामिल होने के लिए सहमत हो गए हैं. लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अभी तक किसी भी तरह का जवाब नहीं दिया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस और चीन इस तरह की पहल को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकती है. हालांकि हाल के समय में ट्रंप और पुतिन के बीच रिश्ते सुधरे हैं, फिर भी बोर्ड की सदस्यता को लेकर मॉस्को ने कोई साफ निर्णय नहीं लिया है.
यूरोपीय देशों ने इस पहल को लेकर ठोस दूरी बनाई है. नॉर्वे और स्वीडन ने स्पष्ट रूप से शामिल होने से मना कर दिया है. फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भी बोर्ड में शामिल होने से इंकार किया है, जिससे ट्रंप ने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ की धमकी दी. इटली और जर्मनी ने संवैधानिक और राजनीतिक अड़चनों का हवाला देते हुए इसमें भाग लेने से इनकार किया है. कनाडा ने सैद्धांतिक सहमति दी है, लेकिन शर्तों पर बातचीत अभी जारी है.
बोर्ड ऑफ पीस का चार्टर बताता है कि सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल का होगा. लेकिन अगर कोई देश 1 अरब डॉलर का योगदान देगा, तो उसे स्थायी सदस्यता मिल सकती है. ट्रंप इस बोर्ड के पहले अध्यक्ष होंगे. उनके करीबी लोग, जैसे मार्को रुबियो और जारेड कुशनर, कार्यकारी सदस्य बनाए गए हैं. यह पहल ट्रंप की महत्वाकांक्षी कूटनीति का हिस्सा है, जिसमें वैश्विक प्रभाव और शांति दोनों को ध्यान में रखा गया है.

कुछ देश अनोखे तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं. बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको ने ट्रंप का न्योता स्वीकार कर लिया है, जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ किसी भी बोर्ड में बैठना उनके लिए अस्वीकार्य है. इस स्थिति से वैश्विक राजनीति में नाटकीय तनाव उत्पन्न हो गया है. ट्रंप की यह पहल अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई देशों के रुख और शर्तों को चुनौती दे रही है.
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