teacher krishna mohan singh suicide: गोरखपुर में एक शिक्षक ने शिक्षा विभाग के बाबू द्वारा 16 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली. मुख्यमंत्री को लिखे सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी गरीबी और सिस्टम के भ्रष्टाचार का दर्दनाक विवरण दिया है.

teacher krishna mohan singh suicide: गोरखपुर में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है. गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड पर रहने वाले एक शिक्षक ने शनिवार सुबह फंदा लगाकर जान दे दी है. मृतक की पहचान 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह के रूप में हुई है. वह मूल रूप से कुशीनगर जिले के हरैया गांव के रहने वाले थे. वह देवरिया जिले के गौरीबाजार क्षेत्र स्थित एक विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे. वे अपने बड़े भाई के साथ परिवार सहित गोरखपुर में रह रहे थे. सुबह करीब साढ़े छह बजे उन्होंने अपने कमरे में यह कदम उठा लिया. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.
इस दुखद घटना से पहले शिक्षक ने चार पन्नों का सुसाइड नोट लिखा था और एक वीडियो भी बनाया था. इन दोनों में उन्होंने शिक्षा विभाग के एक बाबू पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने लिखा कि उनसे लगातार पैसे मांगे जाते रहे. मानसिक रूप से परेशान किया गया. बार बार दफ्तर बुलाकर अपमान किया गया. पुलिस ने सुसाइड नोट को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. परिवार का कहना है कि कृष्ण मोहन सिंह काफी समय से तनाव में थे. वे घर में किसी से खुलकर अपनी परेशानी नहीं बता पा रहे थे. शनिवार सुबह जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला तब परिवार को अनहोनी की आशंका हुई.
परिजनों के अनुसार नौकरी और वेतन बहाली के नाम पर उनसे मोटी रकम ली गई थी. उन्होंने अपनी पत्नी के गहने तक बेच दिए थे. बैंक से कर्ज भी लिया था. आरोप है कि पहले उनसे बीस लाख रुपये मांगे गए. बाद में सोलह लाख रुपये में बात तय हुई. शिक्षक ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने किसी तरह कर्ज लेकर सोलह लाख रुपये दिए. इसके बाद भी उनका वेतन शुरू नहीं हुआ. उन्होंने यह भी लिखा कि वर्ष दो हजार सोलह में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी उनका वेतन वर्ष दो हजार बाईस में रोक दिया गया था. बाद में अदालत से आदेश आने के बाद भी राहत दिलाने के नाम पर पैसे मांगे जाते रहे.
सुसाइड नोट में यह भी बताया गया है कि यह रकम एक साथ नहीं बल्कि किस्तों में दी गई थी. पहली किस्त जुलाई महीने में दी गई थी. बाकी पैसे अलग अलग तारीखों में दिए गए. पैसों का इंतजाम करने के लिए उन्होंने जमीन तक गिरवी रख दी. पत्नी के गहने भी रेहन रखे. बैंक से कई बार पैसे निकाले. उन्होंने यह भी लिखा कि एक पूर्व प्रधानाध्यापक ने ही बाबू से संपर्क करवाया था. लगातार अपमान और कर्ज के बोझ से वह पूरी तरह टूट चुके थे. शुक्रवार को उन्हें दफ्तर बुलाकर फिर से बेइज्जत किया गया. उसी रात से वे बेहद परेशान थे.
कृष्ण मोहन सिंह ने अपना पत्र उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम लिखा था. उन्होंने साफ कहा कि वह मरना नहीं चाहते थे. वह अपने परिवार और बच्चों के लिए जीना चाहते थे. लेकिन उन्हें मजबूर कर दिया गया. उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. साथ ही अपने परिवार को परेशान न करने की अपील भी की है. पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है. घटना के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. घर में मातम का माहौल है.
