Holi 2026: भारत में होली का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर खुशियां बांटते हैं. बड़े हो या बूढ़ें सभी में इस त्योहार की धूम देखने को मिलती है. रंग खेलना, पकवान खाना ये इस पर्व की मुख्य पहचान है. हालांकि, होली कब से मनाई जाने लगी और इसको मनाने के पीछे क्या कारण है. आज तक किसी को ढंग से नहीं पता है. आइए आज हम आपको बताएं कि आखिर होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है. इसे जुड़ी लेकिन कोई एक कथा नहीं बल्कि अनेक पौराणिक कथाएं है. आइए जानते हैं.
ब्रज की होली
होली से जुड़ी कथाओं में सबसे पहला ब्रज की होली है. मान्यता हैं कि श्रीकृष्ण अपना रंग सांवला और राधा रानी के गौरे होने पर यशोदा मां से अपने रंग को लेकर शिकायत करते हैं. उनकी बातें सुन यशोदा मां उनसे कहती हैं कि तुम राधा को रंग लगाकर अपने रंग में रंग दो, जिसके बाद श्रीकृष्ण और उनके मित्र राधा रानी और गोपियों के साथ रंग खेलना शुरू करते हैं. कहा जाता है कि तभी से होली खेलने की शुरूआत हुई थी.
होलिका का वध
ये कहानी एक न एक बार सभी ने सुनी होगी. दरअसल, हिरण्यकश्यप नाम का असुर भगवान विष्णु को अपना कट्टर दुश्मन मानता था. जितना वह भगवान विष्णु का पसंद नहीं करता उतना ही उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु की पूजा किया करता है. इसी वजह से वह अपने ही पुत्र की मारने की कोशिश करता. उसने जितनी बार उसे मारने की कोशिश की. भगवान विष्णु उसे हर बार बचा लेते.
इसी कारण से उसने अपनी बहन होलिका को अपने बेटे को मारने के लिए बुलाया. होलिका को वरदान मिला हुआ था कि वह आग से नहीं मर सकती है. इसी कारण से वह उसे अग्नि में लेकर बैठ गई. भगवान विष्णु की कृपा एक बार फिर बनी और उस आग में होलिका जल गई और प्रहलाद बच गया.
असुर स्त्री से जुडी कहानी
गुरु वशिष्ठ द्वारा एक कथा सुनाई गई थी. कथा के अनुसार एक गांव में एक असुर स्त्री थी. जो लोगों को काफी परेशान करती थी. इसी की वजह से गुरु वशिष्ठ ने बच्चों को सलाह दिया कि असुर स्त्री की मूर्ति बनाकर उसे जला दें. ऐसा करने से उसका वध हो जाएगा और ऐसा ही हुआ. असुर स्त्री का वध होने के बाद सभी ने खुशी से होली मनाई और मिठाईयां खाई.
कामदेव से संबंधित कथा
दरअसल, एक और कथा लोगों के बीच काफी प्रचलित है. ये कथा महादेव और कामदेव की है. दरअसल माता पार्वती जब भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी. तो उस समय वह तपस्या में लीन थे. कामदेव ने जिसके बाद भगवान शिव को विवाह के लिए मनाने के लिए पुष्प बाण चला दिए. इसके कारण भगवान शिव बहुत ज्यादा क्रोधित हो गए और उन्होंने कामदेव को अग्नि से भस्म कर दिया.
हालांकि, बाद में उन्होंने कामदेव को जीवित भी किया और पार्वती जी से विवाह रचाया. माना जाता है कि इसी के बाद से होली का उत्सव लोगों के बीच मनाया जाने लगा.
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