सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर से जुड़े हुए मुकदमे पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर का दर्जा अभ्यार्थी के माता-पिता की सैलरी के आधार पर नहीं किया जा सकता है.
OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर से जुड़े हुए मुकदमे पर अब अहम टिप्पणी की है. कोर्ट में 2 जजों की बेंच ने आज इस मामले में फैसला सुनाया है, उन्होंने कहा कि अभ्यार्थी के क्रीमी लेयर का निर्धारण सिर्फ उसके मां-बाप या उनकी सैलरी के आधार पर नहीं किया जा सका. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की बेंच ने सरकरा की अपील को अपने फैसले से खारिज कर दिया है.
UPSC उम्मीदवारों को मिली राहत
इस फैसले में कोर्ट ने कहा है कि क्रीमी लेयर दर्जा को निर्धारित करते समय पर अभ्यार्थी के माता पिता और अभिभावकों के पदों को भी विशेष रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए. दोनों जजों की बेंच ने सरकार की उन अपीलों को खारिज किया है, जो हाई कोर्ट के फैसलों के खिलाफ में थीं. कोर्ट ने उन सभी UPSC उम्मीदवारों को राहत दी है. जिन्हें सिविल परीक्षा पास करने के बाद भी नौकरी नहीं दी गई थी. आपको बता दें कि सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी को आधार माते हुए उन्हें क्रीमी लेयर की श्रेणी में डाला था.
अब कोर्ट ने साफ किया है कि उम्मीदवारों को आरक्षण से बाहर करने के लिए अधिकारियों ने गलत पैमाना अपनाया था. कोर्ट ने फैसले में लिखा है कि उम्मीदवार के क्रीमी लेयर में आने का फैसला सिर्फ आय के आधार पर नहीं हो सकता है. आपको बता दें कि यह विवाद उन उम्मीदवारों से जुड़ा हुआ है, जिनके मां-बाप सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), बैंक या फिर इसी तरह के संस्थानों में काम करते थे. सरकार ने साल 2004 में एक उनकी सैलरी को एक स्पष्टीकरण का सहारा लेकर आय में जोड़ दिया था.
इसी कारण उम्मीदवार आरक्षण से वंचित हो गए थे. अब कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट का कहना है कि साल 2004 का एक पत्र मुख्य नीति को बदल नहीं सकता है. कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि 6 महीने के अंदर इन सभी उम्मीदवारों के दावों पर फिर से विचार करे. कोर्ट ने कहा है कि अगर जरूरी हो, तो इन सभी उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए अलग से पदों को बनाया जाए.
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