मिडिल ईस्ट में भारत मौजूदा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए इस मामले में जानकारी दी है.
मिडिल ईस्ट में जंग लगातार जारी है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग का असर भारत पर भी दिख रहा है. इस जंग में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर रोक लगा दी, जिसके कारण तेल नहीं आ पा रहा है और ऊर्जा का संकट मंडराता दिख रहा है. आपको बता दें कि भारत मौजूदा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए इस मामले में जानकारी दी है.
रणधीर जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस संकट के शुरू होने के बाद से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अर्घची के बीच में 3 बार बात हो चुकी है. उन्होंने बताया कि इस दौरान दोनों लोगों के बीच आखिरी बार चर्चा ऊर्जा और शिपिंग से जुड़े हुए मुद्दों पर हुई. जायसवाल ने कहा कि इससे आगे की जानकारी देना अभी जल्दबाजी होगी.
उन्होंने बताया कि ईरान में लगभग 9 हजार भारतीय हैं. इन लोगों में स्टूडेंट्स, बिजनेसमैन और तीर्थयात्री शामिल हैं. आपको बता दें कि मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद ईरान में मौजूद भारतीय स्टूडेंट्स सहित कई भारतीय लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया है. ईरान से जो भी लोग वापस भारत आना चाहते हैं, उन्हें वापस लाने की व्यवस्था भी की जा रही है.
रणधीर जायसवाल ने बताया कि 5 मार्च को ही विदेश सचिव ने ईरान के दूतावास में जाकर संवेदना पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे और भारत सरकार की ओर से श्रद्धांजलि दी थी. विदेश मंत्रालय ने बताया है कि ईरान ने 20 फरवरी को 3 जहाजों को भारतीय पोर्ट पर डॉकिंग की परमिशन मांगी थी, जिसके बाद भारत ने 1 मार्च को इसकी मंजूरी दी थी. रणधीर ने कहा कि अभी होर्मुज रूट से भारतीय जहाजों को पास देने की रिपोर्ट की खबरों पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. उन्होंने कहा हालांकि दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बात हुई है.
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