पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में ममता बनर्जी और एम.के. स्टालिन के लिए AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जमकर प्रचार किया. हालांकि इसके बावजूद भी जमीनी स्तर पर उसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है.

बंगाल-तमिलनाडु में केजरीवाल ने झोंकी ताकत
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों ने क्षेत्रीय दलों को चौंकाने के साथ विपक्षी एकता के बड़े चेहरों की चुनावी साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. इन चुनावों के बीच नतीजों को देखते हुए अब सबसे ज्यादा चर्चा आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की हो रही है. आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने ममता बनर्जी और एम.के. स्टालिन के पक्ष में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी.
स्टालिन को बताया था भाई
अरविंद केजरीवाल ने दोनों राज्यों में काफी जमकर प्रचार किया, लेकिन उसके बाद रुझान जो अब नतीजों में तब्दील हो रहे हैं वो बता रहे हैं कि राज्य के लोगों ने उनके प्रचार को पूरी तरह नकार दिया है. आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने स्टालिन को अपना भाई बताते हुए 20 अप्रैल को उनके लिए पुलियानथोपे में रोड शो किया था. इस दौरान उन्होंने बीजेपी को विभाजनकारी पार्टी बताते हुए दावा किया था कि तमिलनाडु के लोग बीजेपी से नफरत करते हैं.
तमिलनाडु में फेल हो गया दांव
अरविंद केजरीवाल के प्रचार और दावों के बाद अब सामने आ रहे रुझानों से एक अलग ही कहानी सामने आ रही है. आपको बता दें कि तमिलनाडु में स्टालिन की DMK तीसरे नंबर पर पिछड़ गई है, वहीं अभिनेता थालापति विजय की नई पार्टी TVK ने राज्य में बड़ा उलटफेर कर दिया है. तमिलनाडु में केजरीवाल का भावुक अपील वाला कार्ड फेल होता नजर आया है.
ममता बनर्जी के पक्ष में की थी रैलियां
तमिलनाडु के साथ ही 26 और 27 अप्रैल को केजरीवाल ने ममता बनर्जी के लिए भी बंगाल में काफी प्रचार किया था. इस दौरान उन्होंने बल्लीगंज की रैली में सेना की तैनाती पर भी सवाल उठाया था. हालांकि केजरीवाल की रैलियों और रोड शो के साथ ममता बनर्जी के लिए प्रचार के बाद भी जमीनी स्तर पर उसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है. पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी सरकार बनाती नजर आ रही है.
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