Ram Mandir Trust: यह लेख राम मंदिर दान विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे और इस पर फैसला लेने के लिए 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की अहम बैठक की जानकारी देता है.

Ram Mandir Trust: अयोध्या के राम मंदिर में दान पुण्य को लेकर आजकल काफी चर्चा चल रही है. इस बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) के बड़े नेता आलोक कुमार का एक बहुत बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने बताया है कि आगामी 11 जुलाई को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बहुत ही जरूरी मीटिंग होने जा रही है. इस मीटिंग में ट्रस्ट के आगे के कामकाज और हाल में जो कुछ भी हुआ है, उस पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि यह मीटिंग ट्रस्ट के दो बड़े चेहरों, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद बुलाई गई है.
आलोक कुमार ने साफ साफ बताया है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दान को लेकर मचे बवाल की नैतिक जिम्मेदारी अपने सिर ली है. इसी वजह से दोनों ने ट्रस्ट के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. आलोक कुमार का कहना है कि दोनों नेताओं ने ईमानदारी और नैतिकता के आधार पर खुद यह कदम उठाया है. हमें उनके इस फैसले की इज्जत करनी चाहिए. अब उनके इस इस्तीफे को मंजूर किया जाए या नहीं, इस बात पर आखिरी फैसला 11 जुलाई को होने वाली इसी बड़ी बैठक में लिया जाएगा.
आखिर यह पूरा मामला है क्या, इसे भी थोड़ा आसान शब्दों में समझ लेते हैं. दरअसल, हाल ही में स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसआईटी (SIT) की एक शुरुआती रिपोर्ट आई थी. इस रिपोर्ट में कहा गया कि राम मंदिर में आने वाले दान के रखरखाव में कुछ गड़बड़ियां और लापरवाही हुई हैं. रिपोर्ट आते ही पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया, एफआईआर दर्ज की और इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया. हालांकि, इस एफआईआर में चंपत राय या अनिल मिश्रा का नाम कहीं नहीं है. लेकिन उन पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि उन्होंने समय रहते इस गड़बड़ी की जानकारी ऊपर क्यों नहीं दी. मजेदार बात यह है कि पकड़े गए लोगों में चंपत राय का एक पुराना ड्राइवर भी शामिल है, जिसके पास बिना किसी अधिकार के दान पेटियों की चाबियां मौजूद थीं.
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने यह भी माना कि इस पूरी घटना की वजह से मंदिर में आस्था रखने वाले आम भक्तों के भरोसे को थोड़ा झटका लगा है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले की जांच बहुत तेजी से पूरा करेंगे. वह चाहते हैं कि इस केस की सुनवाई किसी फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी जल्दी हो सके. दोषियों को जितनी जल्दी सजा मिलेगी, देश विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं का भरोसा मंदिर ट्रस्ट पर दोबारा उतनी ही मजबूती से कायम हो पाएगा.
आलोक कुमार ने मंदिर के आगे के कामकाज को संभालने के लिए एक बढ़िया सुझाव भी दिया है. उन्होंने कहा कि भविष्य में राम मंदिर की व्यवस्था को और ज्यादा पेशेवर और पारदर्शी बनाने की जरूरत है. इसके लिए बैंक या बड़ी कंपनियों की तरह यहाँ भी एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ (CEO) की व्यवस्था शुरू की जानी चाहिए. हालांकि, उन्होंने खुलकर यह नहीं बताया कि 11 जुलाई की बैठक में चंपत राय की जगह किसी नए महासचिव को चुना जाएगा या नहीं. अब सबकी नजरें उसी बैठक पर टिकी हैं कि आगे क्या मोड़ आता है.
