bahrain protest mohammed al mosawi death: बहरीन में शिया एक्टिविस्ट मोहम्मद अलमोसावी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और सरकार ने अब तक 200 से अधिक लोगों को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया है. अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और इजरायल के साथ संबंधों के कारण बहरीन की यह आंतरिक अशांति पूरे मध्य पूर्व के लिए एक नया राजनीतिक संकट पैदा कर सकती है.

bahrain protest mohammed al mosawi death: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग का असर अब खाड़ी देश बहरीन में भी दिखाई देने लगा है. जहां एक तरफ ईरान में सत्ता परिवर्तन की चर्चा हो रही है. वहीं बहरीन के भीतर हालात तेजी से तनावपूर्ण बनते जा रहे हैं. देश में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए हैं. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. हालात बिगड़ते देख सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े हैं. इससे देश के अंदर राजनीतिक और सामाजिक तनाव और बढ़ गया है.
रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुई जंग के बाद बहरीन में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई हैं. अब तक 200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. इनमें ज्यादातर शिया मुस्लिम बताए जा रहे हैं. सरकार का आरोप है कि इन लोगों ने देशद्रोह किया है. कुछ पर जासूसी करने का भी आरोप लगाया गया है. साथ ही दुश्मन देशों के साथ सहयोग और राजशाही के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोप भी लगाए गए हैं. इन आरोपों के कारण सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं.
तनाव उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब 32 साल के शिया एक्टिविस्ट मोहम्मद अलमोसावी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई. इस घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि हिरासत के दौरान उनके साथ गलत व्यवहार किया गया. कुछ संगठनों का कहना है कि उन्हें यातना दी गई थी. इस घटना के बाद शिया समुदाय में गुस्सा और बढ़ गया है. कई लोग इसे अन्याय बता रहे हैं.
दरअसल बहरीन की सामाजिक स्थिति पहले से ही संवेदनशील मानी जाती है. देश की लगभग 60 प्रतिशत आबादी शिया समुदाय से जुड़ी है. लेकिन सत्ता सुन्नी शासकों के हाथ में है. यही असंतुलन कई बार विरोध और असंतोष की वजह बनता रहा है. कुछ मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि देश में डर का माहौल बना हुआ है. कई गिरफ्तार लोगों को वकीलों से मिलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है. उनके परिवारों को भी पूरी जानकारी नहीं मिल रही है. सोशल मीडिया पर लिखी गई पोस्ट को भी गिरफ्तारी का आधार बनाया जा रहा है.
बहरीन की रणनीतिक स्थिति भी इस पूरे मामले को और संवेदनशील बनाती है. यहां अमेरिका की फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय मौजूद है. इसके अलावा बहरीन ने इजरायल के साथ भी अपने संबंध सामान्य कर लिए हैं. जंग की शुरुआत में ईरान ने इसी अमेरिकी फ्लीट को निशाना बनाने की कोशिश की थी. वहीं बहरीन के शिया समुदाय का एक हिस्सा ईरान के प्रति सहानुभूति रखता है. कुछ लोग अमेरिकी ठिकानों पर हो रहे हमलों का समर्थन भी कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जंग लंबी चली तो बहरीन में 2011 के अरब स्प्रिंग जैसी स्थिति फिर से बन सकती है. इससे देश में बड़ा राजनीतिक संकट पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है.
