balochistan genocide letter to trump: इस स्टोरी में जानिए रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को लिखे गए उस विस्फोटक खत के बारे में, जिसमें पाकिस्तानी सेना की एयरस्ट्राइक और बलूच नरसंहार पर सवाल उठाए गए हैं.

balochistan genocide letter to trump: पाकिस्तान के पापों का घड़ा अब पूरी तरह भर चुका है. अब उसे मदद देने वाले बड़े देशों पर भी सवाल उठने लगे हैं. रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है. हाल ही में आजाद घोषित हुए बलूचिस्तान के नेताओं ने एक चिट्ठी जारी की है. इस खत में बताया गया है कि बलूचिस्तान में हो रहे नरसंहार का पाप ट्रंप और जिनपिंग के सिर पर भी जाता है. खत में खुलासा किया गया है कि अमेरिका और चीन से पाकिस्तान को मिलने वाली मदद का इस्तेमाल निर्दोष बलूच लोगों को मारने में किया जा रहा है.
बलूचिस्तान में अत्याचार और चीन-अमेरिका की भूमिका
बलूच नेताओं ने ट्रंप और जिनपिंग को भेजी अपनी चिट्ठी में कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने लिखा कि दोनों देशों से मिलने वाली अरबों डॉलर की मदद और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना कर रही है. जनरल आसिम मुनीर इन हथियारों से बेगुनाह बलूच नागरिकों का कत्लेआम करवा रहे हैं. नेताओं ने आगाह किया है कि अगर चीन और अमेरिका ने तुरंत पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई नहीं रोकी, तो हालात और भी ज्यादा भयानक हो सकते हैं. 12 अगस्त 2026 को सुराब इलाके में हुए हवाई हमले के बाद यह पत्र सामने आया है. उस हमले में महिलाओं और बच्चों समेत 30 बेकसूर बलूच नागरिकों की जान चली गई थी.
सुराब एयरस्ट्राइक और पाकिस्तानी दावों की पोल
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने पत्र में साफ लिखा कि पाकिस्तानी सेना ने हमेशा की तरह इस बार भी दुनिया से झूठ बोला है. सुराब में हुए भयानक हमले को नकार कर पाकिस्तानी सेना ने सच को दबाने की नाकाम कोशिश की. बलूच प्रतिनिधियों का कहना है कि 12 अगस्त को सुराब में निर्दोष लोगों को निशाना बनाना सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन है. यह सीधे तौर पर एक बड़ा युद्ध अपराध है. उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि पाकिस्तान का झूठ बोलने का इतिहास बहुत पुराना है. उसने ओसामा बिन लादेन के मामले में भी अमेरिकी सरकारों को सालों तक अंधेरे में रखा था.
अमेरिकी F-16 फाइटर जेट्स और सैन्य मदद पर सवाल
खत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार से खास अपील की गई है. बलूच नेताओं ने अमेरिका से कहा कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली पाकिस्तानी सरकार पर अब बिल्कुल भरोसा न करे. 9/11 के बाद अफगानिस्तान में हजारों अमेरिकी जवानों की शहादत के पीछे भी इसी पाकिस्तानी सेना का दोहरा चरित्र था. 1983 से 1987 के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को 40 F-16 विमान दिए थे. इसके बाद 2006 में 5 अरब डॉलर का बड़ा रक्षा पैकेज दिया गया था. अमेरिका ने ये हथियार आतंकवाद से लड़ने के लिए दिए थे, लेकिन आज आसिम मुनीर की सेना इन्हीं F-16 विमानों से बलूच नागरिकों की नस्लकुशी कर रही है.
चीनी लड़ाकू विमानों और पनडुब्बियों का सच
पत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी कटघरे में खड़ा किया गया है. 1960 के दशक से चीन द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही घातक सैन्य मदद की पूरी जानकारी दी गई है. 1970 के दशक की शुरुआत में चीन ने पाकिस्तान को 165 MiG-19 विमान दिए थे, जिनका इस्तेमाल बलूच स्वतंत्रता सेनानियों को कुचलने के लिए किया गया. इसके बाद चीन ने F-7, K-8 जेट्स और मिसाइल सिस्टम दिए. पाकिस्तान के साथ मिलकर JF-17 थंडर लड़ाकू विमान बनाए, जो आज बलूचिस्तान पर बम बरसा रहे हैं. इसके अलावा 2015 में चीन ने 5 अरब डॉलर में 8 modern युआन-क्लास पनडुब्बियां देने की डील की थी.
आजाद बलूचिस्तान को मान्यता देने की मांग
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दो शक्तिशाली देशों अमेरिका और चीन को दो टूक समझा दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बलूचिस्तान दो बिल्कुल अलग देश हैं. बलूचिस्तान की जमीन, समंदर या आसमान पर पाकिस्तान का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. खत में मांग की गई है कि पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य मदद और हथियारों की सप्लाई तुरंत रोकी जाए. एक अंतरराष्ट्रीय जांच कमेटी बनाई जाए जो यह तय करे कि हथियारों का इस्तेमाल आम जनता पर न हो. साथ ही दुनिया के तमाम देश बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में औपचारिक मान्यता दें.
