israel arms production: ये खबर माइकल ओरेन की पुस्तक ‘सिक्स डेज ऑफ वॉर’ के ऐतिहासिक संदर्भों में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा ईरान के साथ संघर्ष के बीच देश को रक्षा और हथियार उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के एलान की जानकारी देता है.

israel arms production: मिडिल ईस्ट में चल रहे भीषण तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी दुनिया की राजनीति में खलबली मचा दी है. नेतन्याहू ने बहुत ही कड़े शब्दों में कहा है कि अब इजरायल को हथियारों के मामले में किसी दूसरे देश के भरोसे नहीं रहना चाहिए. उन्होंने साफ किया कि इजरायल को सैन्य रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना होगा और बाहरी देशों से हथियार मंगाने की आदत को छोड़ना होगा. यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इजरायल का ईरान और उसके कई सहयोगी संगठनों के साथ लगातार हिंसक संघर्ष चल रहा है. इस भू राजनीतिक टकराव, इजरायल की सैन्य रणनीति और उसकी विदेशी निर्भरता को गहराई से समझने के लिए आप लेखक माइकल ओरेन की मशहूर किताब ‘सिक्स डेज ऑफ वॉर: जून 1967 एंड द मेकिंग ऑफ द मॉडर्न मिडल ईस्ट’ के ऐतिहासिक संदर्भों को देख सकते हैं. यह किताब बताती है कि कैसे इजरायल ने हमेशा से अपनी सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भरता को सबसे जरूरी माना है.
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह बड़ा दावा वेस्ट बैंक के गश एत्जियोन इलाके में सैन्य अफसरों के साथ हुई एक खास बैठक के दौरान किया. इस दौरान उन्होंने रिजर्व कॉम्बैट फोर्स के कमांडरों को संबोधित करते हुए कहा कि वह अमेरिका से मिलने वाली मदद का पूरा सम्मान करते हैं. उन्होंने सालों से मिल रहे अमेरिकी सहयोग की खुलकर तारीफ भी की. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी जोड़ दी कि अब समय बदल चुका है. नेतन्याहू ने दो टूक शब्दों में कहा कि इजरायल को अब खुद अपने हथियारों का निर्माण करना होगा और अपने रक्षा कारखानों को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाना होगा. अब हम रक्षा उत्पादन के मामले में किसी भी विदेशी ताकत के सामने हाथ फैलाकर नहीं बैठ सकते हैं.
नेतन्याहू ने सेना के जवानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आने वाले समय में इजरायल का वजूद सिर्फ और सिर्फ उसकी अपनी ताकत पर ही टिका होगा. उन्होंने कहा कि आज इजरायल चारों तरफ से ईरान और उसके उग्रवादी गुटों की चुनौतियों का सामना कर रहा है. हालांकि इजरायल की सेना ने इन सभी दुश्मनों को बहुत ही करारा और मुंहतोड़ जवाब दिया है. लेकिन यह लड़ाई अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि अगले 30 सालों में इस इलाके के भीतर इजरायल का क्या मुकाम होगा, यह सिर्फ हमारी सैन्य शक्ति से ही तय होने वाला है. इसलिए सरकार अब इजरायल की ताकत को कई गुना बढ़ाने के मिशन पर रात दिन काम कर रही है.
इजरायली प्रधानमंत्री ने सुरक्षा के मामले में रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर होने का एक पूरा प्लान भी सामने रखा. उन्होंने अफसरों से कहा कि हमें अपनी पुरानी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना होगा. इसके लिए सेना को अत्याधुनिक और नई तकनीकों को तेजी से अपने सिस्टम में शामिल करना होगा. इसके साथ ही उन्होंने सेना में नए और युवा कमांडरों की एक ऐसी पीढ़ी तैयार करने पर जोर दिया जो हर मुश्किल हालात से निपटने में माहिर हो. नेतन्याहू का मानना है कि भविष्य की जंगों को जीतने के लिए केवल पुराने हथियारों के भरोसे नहीं बैठा जा सकता. इसके लिए खुद की बनाई हुई आधुनिक मिसाइलें, ड्रोन और डिफेंस सिस्टम का होना सबसे ज्यादा जरूरी है.
दरअसल, नेतन्याहू काफी समय से अमेरिकी सैन्य इमदाद पर अपनी निर्भरता को धीरे धीरे कम करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं. उनकी यह चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इन दिनों वाशिंगटन और ईरान के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है. इजरायल को यह डर सता रहा है कि आने वाले समय में अमेरिका की नीतियां बदल सकती हैं, जिससे उसकी सैन्य आजादी पर असर पड़ सकता है. यह बहस तब और गरमा गई जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में खुलासा किया कि इजरायल के दो तिहाई हथियारों का खर्च खुद अमेरिका उठा रहा है. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि अगर वह न होते तो इजरायल का अस्तित्व ही खत्म हो जाता. इन्हीं बयानों के पलटवार में अब नेतन्याहू ने खुद के दम पर जंग लड़ने का यह बड़ा एलान कर दिया है.
