Delhi infrastructure safety lapses: ये खबर इतिहास और व्यवस्था की चुनौतियां’ नामक पुस्तक के संदर्भ में दिल्ली के यमुना विहार, पहाड़गंज और उत्तम नगर में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे कोचिंग बेसमेंट और अवैध होटलों पर आजतक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के बड़े खुलासे की पूरी जानकारी देता है

Delhi infrastructure safety lapses: देश की राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक लापरवाही और नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए ‘मौत के इंफ्रास्ट्रक्चर’ पर आजतक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है. लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण हादसे और साल 2024 में दिल्ली के ओल्ड राजिंदर नगर में एक कोचिंग के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत के बाद भी हमारे सरकारी तंत्र ने कोई सबक नहीं लिया है. आज भी दिल्ली के कई इलाकों में छात्रों और आम लोगों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है. इस जमीनी हकीकत, दिल्ली के अनियोजित विकास और प्रशासनिक कमियों को गहराई से समझने के लिए आप लेखक दुष्यंत कुमार की मशहूर किताब ‘दिल्ली: इतिहास और व्यवस्था की चुनौतियाँ’ का संदर्भ ले सकते हैं. यह किताब साफ बताती है कि कैसे कानूनी खामियों का फायदा उठाकर व्यावसायिक इमारतें सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर देती हैं.
आजतक की टीम जब उत्तर पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार इलाके में पहुंची, तो वहां कोचिंग सेंटर्स का एक खतरनाक खेल देखने को मिला. यहां ‘फ्यूचर वर्ल्ड टेक्निकल इंस्टीट्यूट’ नाम के कोचिंग के बेसमेंट में महज 10×10 फुट के एक छोटे से कमरे के भीतर अवैध रूप से लाइब्रेरी चलाई जा रही थी. इस घुटन भरे कमरे में 25 स्टडी क्यूबिकल ठूंस ठूंस कर बनाए गए थे और बाहर निकलने के लिए बायोमेट्रिक गेट लगा था, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में बच्चों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. ठीक इसी तरह, कुछ ही दूरी पर स्थित ‘हॉरिजॉन एकेडमी’ में भी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए टॉप फ्लोर से लेकर बेसमेंट तक में बच्चों की क्लास धड़ल्ले से चलाई जा रही थी. ओल्ड राजिंदर नगर जैसी बड़ी त्रासदी झेलने के बाद भी शिक्षा के नाम पर बच्चों को मौत के इन तहखानों में बिठाया जा रहा है, जहाँ न तो आग से बचने के पुख्ता इंतजाम हैं और न ही बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता है.
पड़ताल का अगला पड़ाव दिल्ली का बेहद व्यस्त इलाका पहाड़गंज था, जहाँ संकरी गलियों में नियमों को ताक पर रखकर बड़ा खेल चल रहा था. सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (B&B) योजना का मकसद यह था कि लोग अपने घरों के कुछ कमरों में पर्यटकों को ठहरा सकें. लेकिन पहाड़गंज के तेल मंडी इलाके में ‘द युवान B&B’ नाम की प्रॉपर्टी में इतनी संकरी गलियों के बीच चार मंजिला इमारत में पूरे 16 कमरे बनाकर होटल चलाया जा रहा था. मुल्तानी ढांडा इलाके में स्थित ‘ब्लू बेरी’ नाम की एक अन्य प्रॉपर्टी में भी इसी तरह का नजारा देखने को मिला, जहाँ बेहद पतली सीढ़ियों के सहारे 8 कमरों का व्यवसायिक संचालन हो रहा था. इन जगहों पर ‘निधि’ (NIDHI) पोर्टल का सरकारी सर्टिफिकेट टांगकर पर्यटकों को यह भरोसा दिलाया जा रहा था कि सब कुछ वैध है, जबकि वास्तविकता यह है कि इन इमारतों के पास फायर सेफ्टी और स्थानीय निकायों की जरूरी मंजूरियां तक नहीं थीं.
पहाड़गंज की इस पड़ताल में सुरक्षा से जुड़ा एक और सबसे डरावना और हैरान करने वाला पहलू भी सामने आया. यहाँ करीब 50 वर्ग गज के एक छोटे से भूखंड पर बनी बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर गत्ते का बड़ा गोदाम था, जिसमें प्लास्टिक काटने की मशीनें चल रही थीं. सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि बिजली का एक पूरा पोल ही इस रिहायशी इमारत के ढांचे के भीतर दबा हुआ था. इस बेहद संवेदनशील और खतरनाक स्थिति को लेकर खुद बिजली कंपनी बीएसईएस (BSES) ने स्थानीय नबी करीम थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी. संकरी गलियाँ, ज्वलनशील पदार्थों का अवैध भंडारण और इमारत के अंदर से गुजरता बिजली का पोल किसी भी वक्त पहाड़गंज में एक बड़े अग्निकांड को दावत दे रहा है, लेकिन प्रशासन सब कुछ देखकर भी आंखें मूंदे बैठा है.
जांच टीम जब दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में पहुंची, तो वहां भी बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना की आड़ में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा मिला. ‘एसजे रेजीडेंसी’ नाम की जगह पर कागजों में तो यह योजना दर्ज थी, लेकिन जमीन पर चार मंजिलों में पूरे 27 कमरों का एक बड़ा कमर्शियल होटल चलाया जा रहा था. इसी तरह ‘ब्लू मून होटल’ में भी सीमित कमरों की सरकारी अनुमति होने के बावजूद मौके पर 14 एसी और नॉन एसी कमरे किराए पर चलते हुए पाए गए. यमुना विहार से लेकर पहाड़गंज और उत्तम नगर तक की यह पड़ताल साफ करती है कि सरकारी एजेंसियां केवल किसी बड़े हादसे और मासूमों की मौत के बाद ही कुछ दिनों के लिए जागती हैं. नियम सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ा रहे हैं और आम जनता की सुरक्षा आज भी भ्रष्ट सिस्टम की प्राथमिकताओं में कहीं दूर दूर तक शामिल नहीं है.
