भागलपुर में बाढ़ से लोगों के रोजगार पर भी काफी असर पड़ा है. नाथनगर और चंपानगर का पावरलूम उद्योग बंद हो गया है. मशीनें पानी में डूब रही हैं, जिससे हजारों बुनकरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया.
बिहार के भागलपुर में बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुसने के साथ अब उनके रोजगार पर भी भारी पड़ रहा है. सिल्क सिटी के नाम से मशहूर भागलपुर के नाथनगर और चंपानगर के बुनकर बहुल इलाके जलमग्न हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक बाढ़ का पानी पावरलूम घरों में घुसने से सिल्क और कपड़ा कारोबार पर असर पड़ा है. बताया जा रहा है कि मशीनें पानी में डूब गई हैं और पावरलूम का काम पूरी तरह से बंद हो गया है. इससे हजारों बुनकर परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
सुरक्षित जगहों पर रख रहे मशीनें
आपको बता दें कि बाढ़ का पानी तेजी से नाथनगर और चंपानगर के रिहायशी और कारोबारी इलाकों में फैला है. पानी पावरलूम घरों तक भी पहुंच गया, जिससे कई मशीनें डूब गईं. बिजली की मोटरों में पानी पहुंचने के खतरे को देखते हुए बुनकर उन्हें खोलकर सुरक्षित जगह पर रख रहे हैं. बुनकरों का कहना है कि अगर मशीनों में पानी भर गया तो उन्हें दोबारा शुरू करने में काफी समय और पैसा लगेगा.
बड़ी संख्या में मिलते थे आर्डर
बताया जा रहा है कि दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों को देखते हुए बुनकरों और कारोबारियों को कई ऑर्डर मिले थे. स्थानीय और दूसरे शहरों के व्यापारियों ने कपड़ों के लिए लाखों रुपए के ऑर्डर दिए थे, लेकिन बाढ़ के कारण पावरलूम बंद होने से अब माल को समय पर तैयार करके देना मुश्किल हो गया है. अगर ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हुए तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और कई ऑर्डर रद्द भी हो सकते हैं.
रिश्तेदारों के घर रह रहे लोग
आपको बता दें कि चंपानगर का मस्जिद लेन, बोरिंग बाड़ी, मदनीनगर और गली नंबर एक से पांच तक का इलाका बाढ़ के पानी में डूब गया है. बताया जा रहा है कि करीब पांच हजार लोग इससे सीधे प्रभावित हो रहे हैं. पानी लगातार जमा रहने और घरों में आने के खतरे के कारण कई परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं.
लंबे समय तक रहता है बाढ़ का पानी
इन हालातों के चलते बुनकरों का कहना है कि पावरलूम चलने पर उन्हें दिनभर काम करने के बाद करीब 400 से 500 रुपए की मजदूरी मिलती है. इसी कमाई से उनके परिवार का खर्च चलता है, लेकिन बाढ़ के कारण काम बंद होने से रोज की आमदनी रुक गई है. बुनकरों के मुताबिक इस इलाके में बाढ़ का पानी अक्सर डेढ़ से दो महीने तक जमा रहता है. अगर इस बार भी पानी लंबे समय तक रहा तो उनके सामने आर्थिक संकट और बढ़ सकता है.
