भरत भूषण तिवारी मामले में पुलिस की धीरे-धीरे मुसीबत बढ़ती जा रही है। अब वो राज खुलेगा, जिसके इंतजार में भरत के घर और गांव में हजारों लोग डेरा डालकर बैठे हुए हैं। उसके पिता-मां, भाई-बहन उसके साथ खड़े हैं, ताकि एक निर्दोष व्यक्ति को अपराधी घोषित करके उसके दामन पर अपराधी का दाग ना लगे और उसके परिवार वालों की जिंदगी ना बर्बाद हो।, ऐसे में एक बड़ा अपडेट ये है कि फॉरेंसिक साइंस लैब यानी कि FSL ने पुलिस से हथियार जब्त करके फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। और अब फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। उस फोरेंसिक रिपोर्ट से ये खुलासा हो जाएगा कि किस हथियार से गोली मारी गई। क्या सिर्फ एक हथियार से पांच गोली मारी गई थी? या उसमें दो हथियार यूज हुए थे, तीन हथियार यूज हुए थे? पुलिस ने सरकारी बंदूक से गोली मारी थी या ये अक्सर कहा जाता है कि पुलिस के पास एक सरकारी, एक गैर-सरकारी बंदूक होती है… तो कहीं गैर-सरकारी बंदूक का इस्तेमाल तो नहीं हुआ था? या ऐसा भी तो नहीं था कि जो बंदूक भरत तिवारी ने सरेंडर करते समय फेंका था, उसी बंदूक को पुलिस ने एहतियात बरतते हुए ताकि फिंगर प्रिंट ना आए, और उसी का यूज करते हुए भरत को उसी से मार दिया हो? तो जो भी राज है, ये सारे राज FSL की रिपोर्ट में खुलेंगे।
फॉरेंसिक जांच के लिए तीन हथियार भेजे गए हैं। इनमें शाहपुर के निलंबित थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की सर्विस पिस्टल, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की सरकारी सर्विस पिस्टल और एनकाउंटर के बाद भरत भूषण तिवारी के पास से बरामद बताई गई पिस्टल शामिल है। इसके अलावा घटनास्थल से मिले दो जिंदा कारतूस और दो खोखों की भी फोरेंसिक जांच होगी। एफएसएल के बैलिस्टिक एक्सपर्ट यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि, बरामद खोखे किस हथियार से फायर हुए थे और क्या घटनास्थल से मिले एविडेंस पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं। यही वजह है कि इस रिपोर्ट को पूरे मामले का सबसे अहम फोरेंसिक साक्ष्य माना जा रहा है।
एफएसएल रिपोर्ट से क्या पता चलेगा?
पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि भरत भूषण तिवारी को लगी गोली किस हथियार से चली थी। पुलिस की एफआईआर के मुताबिक एनकाउंटर के दौरान पुलिस की ओर से कुल पांच राउंड फायरिंग हुई थी। एफआईआर में कहा गया है कि, शाहपुर एसएचओ ने एक राउंड और एसटीएफ जवान ने चार राउंड फायर किए। वहीं पुलिस का यह भी दावा है कि भरत भूषण तिवारी की ओर से भी कई राउंड फायरिंग की गई। अब इन दावों की पुष्टि का महत्वपूर्ण आधार एफएसएल की रिपोर्ट होगी। यदि जांच किसी स्पष्ट निष्कर्ष पर पहुंचती है तो इससे घटनाक्रम को समझने में काफी मदद मिल सकती है।
खोखे बताएंगे पूरी कहानी
बैलिस्टिक जांच की सबसे बड़ी खासियत यही होती है कि हर हथियार फायरिंग के बाद खोखे पर अपनी अलग पहचान छोड़ता है। एक्सपर्ट इन्हीं बारीक निशानों का मिलान पिस्टलों से करेंगे। इसी प्रोसेस से यह पता लगाया जाता है कि, कौन-सा खोखा किस हथियार से निकला। इसी वजह से अदालत की अनुमति मिलने के बाद तीनों हथियारों को सील कर सुरक्षित तरीके से पटना स्थित एफएसएल भेजा गया है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित जांच एजेंसी को सौंपी जाएगी।
परिवार की क्या है मांग?
भरत भूषण तिवारी का परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि, पूरे मामले की सच्चाई फोरेंसिक जांच और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया से सामने आनी चाहिए, वहीं पुलिस का कहना है कि, मामले की जांच नियमानुसार चल रही है और उपलब्ध सभी एविडेंस का परीक्षण कराया जा रहा है। अब पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा एफएसएल रिपोर्ट को लेकर है, क्योंकि यही रिपोर्ट कई तकनीकी सवालों के जवाब दे सकती है और आगे की जांच की दिशा भी तय कर सकती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे लोगों की निगाहें इसी रिपोर्ट पर टिकती जा रही हैं। क्या वैज्ञानिक जांच पुलिस के आधिकारिक घटनाक्रम की पुष्टि करेगी? क्या रिपोर्ट नए सवाल खड़े करेगी? या फिर पूरे मामले की तस्वीर पहले से ज्यादा साफ होगी? इन सभी सवालों के जवाब एफएसएल की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल पूरा गांव, भरत का परिवार और इस मामले पर नजर रखने वाले लोग एक ही बात कह रहे हैं, सच्चाई जो भी हो, वह सामने आनी चाहिए और जांच के आधार पर ही जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
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