विपक्ष ने सरकार पर डस्टबिन में घोटाला करने का आरोप लगाया है. विपक्ष के इस गंभीर आरोप के बाद से बिहार में सियासी घमासान शुरू हो गया है. बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों से इनकार किया है.
इन दिनों बिहार में डस्टबिन घोटाला बेहद चर्चा का विषय बना हुआ है. राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं. आपको बता दें कि यह पूरा मामला तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के कार्यकाल के दौरान कुछ मेडिकल डस्टबिन की खरीद से जुड़ा है. RTI से मिली जानकारी के मुताबिक एक डस्टबिन की कीमत 15,490 थी.
लालू यादव की बेटी ने लगाया आरोप
डस्टबिन की क़ीमत को लेकर विपक्ष ने घोटाले का आरोप लगाना शुरू किया. लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर कहा कि जहां एक सामान्य डस्टबिन की कीमत 1500 रुपए होती है, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें 15 हजार में खरीदा. रोहिणी ने इसे डस्टबिन घोटाला करार देते हुए कहा कि डस्टबिन भी VIP हो गया है.
सामान्य डस्टबिन से तुलना गुमराह करने वाला
आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग के लिए दवाओं और दूसरे उपकरणों की खरीद का काम BMSICL (बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड) संभालता है. जब ये मेडिकल डस्टबिन खरीदे गए थे उस दौरान नीलेश देवड़े BMSICL के मैनेजिंग डायरेक्टर थे. वहीं इस मामले को लेकर BMSICL के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर सुब्रत सेन का कहना है कि इन मेडिकल डस्टबिन की तुलना सामान्य घरेलू या म्युनिसिपल डस्टबिन से करना गुमराह करने वाला है.
खास कंटेनर होने का दावा
बताया जा रहा है कि बिहार में स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदे गए डस्टबिन सामान्य डिब्बे नहीं हैं, बल्कि ये बायोमेडिकल कचरे के लिए खास कंटेनर हैं. खासकर माइक्रोवेव/ऑटोक्लेव-सेफ और दोबारा इस्तेमाल होने वाले यूनिट, जिन्हें खास तापमान पर काम करने और मेडिकल कचरे की रीसाइक्लिंग में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसलिए बाजार में मिलने वाले सामान्य कचरे के डिब्बों की तुलना में इनकी शुरुआती कीमत ज्यादा है.
RJD ने लगाए गंभीर आरोप
इस मामले को लेकर विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता शक्ति यादव ने इसे डस्टबिन घोटाला करार दिया है. विपक्ष का आरोप है कि 15 हजार की कीमत वाले मेडिकल डस्टबिन की खरीद जो कि 1,500 वाले सामान्य डस्टबिन के मुकाबले बहुत महंगे हैं. इसलिए विपक्ष इसे डस्टबिन घोटाला बता रहा है.
बीजेपी ने किया इनकार
इस पूरे मामले को लेकर भाजपा प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि सिर्फ बयानों से भ्रष्टाचार साबित नहीं होता है. उन्होंने कहा कि कोई अनियमितता है तो इसकी जांच (CAG) या विधानसभा की लोक लेखा समिति द्वारा की जा सकती है.
