गर्मी आते ही सांप काटने के केस में वृद्धि देखने को मिलती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सांप ठंडी लेने के लिए घरों में घुसते हैं और अनजाने में इंसान इनकी चपेट में आ जाते है. बात करें भारत में सबसे ज्यादा सांपों के काटने की वजह से होने वाले मौतों की संख्या की,तो उसमें सबसे पहला नाम बिहार का है. कई रिपोर्ट के अनुसार बिहार में हर साल सांपों की वजह से होने वाली मौतों की संख्या 10 हजार के करीब है.
हालांकि, यहां पर सांपों के काटने से होने वाली मौतों की मुख्य वजह जहर नहीं बल्कि यहां के कुछ लोगों में मौजूद अंधविश्वास है. ऐसा हम नहीं बल्कि कई रिपोर्ट कहते हैं. दरअसल, बिहार में जहरीले सांपों की संख्या कई ज्यादा है. यहां पर मौजूद सांप इतने जहरीले होते है कि लोगों को इलाज करवाने तक की भी समय नहीं मिल पाता है. ऐसे में लोगों में मौजूद अंधविश्वास इस हालात को और ज्यादा खराब कर देते हैं.
आइए आपको बताएं कैसे अंधविश्वास से लोगों की जान जाती है.
ऐसा एक केस लोगों के बीच काफी ज्यादा फेमस हुआ था. जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में रह रहा था. जब वह सो रहा था तो अचानक ही उसे कुछ पैरों में चुभने जैसा महसूस हुआ था. जैसे ही उसने देखा तो पैरों पर सांप के काटने के निशान बने हुए थे, जिसके बाद घरवालों को इसके बारे में बताया गया. जिस समय समझदारी दिखा कर अस्पताल के लिए रवाना होना चाहिए था. ऐसे समय में परिवार ने ओझा को बुलाने का फैसला लिया. मान्यता है कि ओझा, किस सांप ने काटा है और विष है कि नहीं इसका पता लगा लेते हैं. ओझा आए, उन्होंने लड़के के पैरों के निशान देखे और कहा कि छुछंदर ने काटा. परिवार वालों ने ये सुनकर भले ही राहत की सांस ली लेकिन लड़के की हालात काफी ज्यादा बिगड़ने लगीं, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया.
शाम तक हालत में लगा कि सुधार हो सकता है. तो रात-रात होते-होते लड़के की जहर के कारण मौत हो गई. इलाज में सामने आया कि बिहार में पाए जाने वाले सबसे जहरीले सांप स्पेक्टिकल्ड कोबरा जिसे गेहूंवन कहते हैं. उसके जहर के कारण मौत हो गई. मौत की खबर सुनते ही पूरे परिवार में चीख-पुकार मच गई. अंधविश्वास के कारण उनके बेटे की जान चली.
ऐसा एक ही केस हमने आपको बताया है, लेकिन कई ऐसे रिपोर्ट है. जो इस भयावह स्थिति को दिखाते हैं.
बात करें अकेले अंधविश्वास के कारण होने वाले मौतों की, तो ये बिल्कुल गलत होगा. दरअसल, बिहार में सांप से होने वाली मौत के पीछे अंधविश्वास ही नहीं बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवाओं का न होना और अस्पताल की दूरी भी है. कई लोगों द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया है लेकिन आज तक इसके केस में कमी देखने को नहीं मिली है.
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