शाहजहांपुर शहर में होली के त्योहार पर अनोखी परंपरा है. यहां भैंसा गाड़ी पर बैठकर लाट साहब निकलते हैं और हजारों लोग उनके ऊपर जूते-चप्पल बरसाते हैं. यह परंपरा यहां 300 सालों से भी ज्यादा पुरानी है.
शाहजहांपुर की अनोखी होली
होली का त्योहार पास में है. देश में कई जगहों पर अनोखे तरीकों से होली का त्योहार मनाया जाता है. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में भी एक ऐसी परंपरा है, जिसमें रंगों की जगह पर जूते-चप्पलों से होली खेली जाती है. शहर की यह परंपरा लगभग 300 सालों से भी ज्यादा पुरानी है. यह परंपरा नवाबों के विरोध से शुरू हुई थी, इस परंपरा में भैंसा गाड़ी पर बैठा हुआ ‘लाट साहब’ यहां के हजारों लोगों के निशाने पर होता है. शाहजहांपुर में मनाई जाने वाली यह होली गुलामी की मानसिकता पर विरोध का एक ऐतिहासिक प्रतीक बना हुआ है.
भैंसा गाड़ी पर बैठे लाट साहब के ऊपर बरसाए जाते जूते-चप्पल
शाहजहांपुर में होली के त्योहार पर मनाई जाने वाली इस परंपरा के बारे में सुनकर हैरानी होती है, लेकिन यह सच है. यहां की लाट साहब परंपरा पूरी दुनिया में मशहूर है. इस परंपरा में एक व्यक्ति को भैंसा गाड़ी पर बिठाया जाता है, जो हजारों लोगों के निशाने पर होता है. हजारों लोगों की भीड़ गलियों में नारों के साथ में भैंसा गाड़ी पर बैठे हुए लाट साहब के ऊपर जूते-चप्पल बरसाती है. यह परंपरा शहर में 300 सालों से भी ज्यादा समय से मनाई जाती है.
साल 1746 से हुई थी परंपरा की शुरुआत
शाहजहांपुर में इस परंपरा की शुरूआत साल 1746 में किले के आखिरी नवाब अब्दुल्ला खान के दौर से हुई थी. 1857 की क्रांति के बाद में हालातों में बदलाव आया और आक्रोश बढ़ गया साल 1859 में होली के त्योहार पर लोगों ने नवाबों को बेइज्जत करके विरोध जताया, जिसके बाद धीरे-धीरे यह विरोध आज के समय के लाट साहब जुलूस में बदल गया. पहले के समय पर हाथी-घोड़ों पर जुलूस निकाला जाता था, लेकिन आपत्तियों के बाद में ऊंची सवारी पर रोक लग गई और नवाब साहब भैंसा गाड़ी पर बाहर निकलने लगे. साल 1988 में तत्कालीन जिलाधिकारी कपिल देव ने नवाब का नाम बदलकर लाट साहब रख दिया.
8 किमी तक निकाला जाता है जुलूस
इस जुलूस में अंग्रेज गवर्नरों के प्रतीक के तौर पर आज के समय में भी लाट साहब को हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर पहनाया जाता है और सुरक्षा घेरे के साथ लगभग 8 किमी तक जुलूस निकाला जाता है. शाहजहांपुर महानगर की चौक कोतवाली पर लाट साहब कोतवाल से पूरे साल का लोखा-जोखा मांगते हैं. जिसके बाद नगद रकम के साथ में शराब की बोतल पेश की जाती है. आपको बता दें कि शाहजहांपुर का यह जुलूस UPSC ट्रेनिंग मॉड्यूल में केस स्टडी के तौर पर भी शामिल किया गया है.
शहर के इलाकों में निकलते छोटे और बड़े लाट साहब
इस परंपरा के तौर पर शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े और छोटे लाट साहब निकलते हैं. इस परंपरा में शहर के किसी इलाके में लाट साहब भैंसा गाड़ी पर बैठकर निकलते हैं तो किसी इलाके में गधे की सवारी पर निकलते हैं. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर शहर में मनाई जान वाली यह लाट साहब परंपरा पूरी दुनिया में मशहूर है, इस होली को देखने के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं.
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