US-Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि 14 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता होगा. इस डील के तुरंत बाद दुनिया के महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा खोल दिया जाएगा.

US-Iran Deal: मिडिल ईस्ट में चल रही भारी खींचतान के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत बड़ा दावा कर दिया है. उन्होंने कहा है कि १४ जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक समझौता होने जा रहा है. ट्रंप का मानना है कि इस नई डील के होने से दोनों देशों के रिश्तों में बहुत बड़ा बदलाव आएगा. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार और सुरक्षा को लेकर जो चिंताएं बनी हुई थीं, वे भी काफी हद तक दूर हो जाएंगी.
राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक इस पूरे समझौते का सबसे अहम हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है. उन्होंने साफ कहा है कि इस डील के बाद इस बात की पूरी गारंटी मिल जाएगी कि ईरान आने वाले समय में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा. ट्रंप ने इस नए समझौते को परमाणु हथियार न बनाने की एक मजबूत दीवार की तरह बताया है. इस डील के लागू होते ही ईरान के पास परमाणु हथियार खरीदने, उन्हें खुद विकसित करने या किसी भी दूसरे तरीके से हासिल करने का कोई रास्ता नहीं बचेगा. ट्रंप को उम्मीद है कि इस कड़े कदम से पूरे इलाके में शांति और स्थिरता लौट आएगी.
इस समझौते का एक और सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसके तुरंत बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया जाएगा. होर्मुज स्ट्रेट समुद्र का एक ऐसा अहम रास्ता है जहां से दुनिया भर के तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है. पिछले कुछ समय से जारी तनाव की वजह से इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हो रही थी, जिससे वैश्विक तेल बाजार काफी दबाव में था. अब ट्रंप का दावा है कि डील पर दस्तखत होते ही इस रास्ते को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए तुरंत चालू कर दिया जाएगा. इस फैसले से दुनिया भर के बाजारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस बात की जानकारी साझा करते हुए एक पोस्ट भी लिखा है. उन्होंने लिखा कि अमेरिका आने वाले समय में ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट के देशों के साथ मिलकर काम करने को लेकर बहुत उत्साहित है. इसके साथ ही उन्होंने पूर्व अमेरिकी सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना भी साधा है. ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय में ईरान के साथ हुए पुराने समझौतों की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि ओबामा सरकार के दौरान ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर दिए गए थे, लेकिन इस बार अमेरिका ईरान को कोई सीधा पैसा या वित्तीय भुगतान नहीं करने वाला है.
ट्रंप ने अपने बयान के आखिर में ईरान को एक कड़ा संदेश और चेतावनी भी दे दी है. उन्होंने संकेत दिया है कि भविष्य में ईरान के परमाणु ठिकानों की कड़ी निगरानी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर जरूरी सुधार भी किए जाएंगे. उन्होंने साफ कहा कि अगर आगे कोई भी गड़बड़ी दिखी, तो अमेरिका ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं को नियंत्रित करने के लिए अपनी आधुनिक सैन्य ताकतों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा. ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि यह समझौता सही से काम नहीं करता है, तो उनके पास स्थिति से निपटने के लिए दूसरे कड़े विकल्प भी पूरी तरह तैयार हैं.
