yuvraj singh retire story: युवराज सिंह ने अपनी कैंसर से वापसी के बाद टीम में सम्मान और सपोर्ट न मिलने की वजह से 2019 में संन्यास लिया था. रॉबिन उथप्पा के अनुसार विराट कोहली, युवराज सिंह ने संन्यास विराट कोहली की वजह से लिया था.

yuvraj singh retire story: क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह एक बड़ा खुलासा है कि युवराज सिंह के करियर के आखिरी दौर में उन्हें टीम में कम मौके मिलने के पीछे क्या वजह थी. रॉबिन उथप्पा ने 2025 में एक इंटरव्यू में कहा था कि विराट कोहली की कप्तानी के तरीके ने युवराज को खुद को कमतर महसूस कराने पर मजबूर किया. युवराज ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से वापसी की थी, लेकिन कोहली के नेतृत्व में उन्हें टीम में पूरी तरह शामिल नहीं किया गया. इससे युवराज ने खुद को अंडरवैल्यूड और टीम से असुरक्षित महसूस किया है.
युवराज सिंह ने सानिया मिर्जा के साथ इंटरव्यू में भी यही बात दोहराई. उन्होंने कहा कि जिस समय उन्हें सबसे ज्यादा सम्मान और सपोर्ट मिलना चाहिए था, तब उन्हें वह नहीं मिला. इसके कारण 2019 में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया. युवराज ने खुलकर कहा कि उन्हें अपने खेल में मजा नहीं आ रहा था और वह यह सोचने लगे थे कि यह खेल वह क्यों खेल रहे हैं, जब उन्हें सही सम्मान और समर्थन नहीं मिल रहा है.
उथप्पा ने बताया कि विराट कोहली की कप्तानी का अंदाज एक्सक्लूसिव था, जिसका मतलब था – “मेरे तरीके से या बाहर.” इसका मतलब यह था कि खिलाड़ियों को कप्तान के तय मानकों के अनुसार ही फिट होना पड़ता था. वहीं रोहित शर्मा की कप्तानी को समावेशी कहा गया, जिसमें खिलाड़ियों की ताकत और कमजोरियों के अनुसार उन्हें संभालने की कोशिश होती थी. उथप्पा ने कहा कि एक्सक्लूसिव लीडरशिप में कई खिलाड़ी खुद को कमतर महसूस कर सकते हैं, जैसा कि युवराज के मामले में हुआ.
उथप्पा ने यह भी बताया कि युवराज ने टीम में वापसी के दौरान सिर्फ दो पॉइंट की छूट मांगी थी, लेकिन उसे भी नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि क्रिकेट में फिटनेस टेस्ट जरूरी है, लेकिन यह पूरी तरह से खिलाड़ी की क्रिकेटिंग वैल्यू तय नहीं करता. युवराज ने फिटनेस टेस्ट पास किया, लेकिन एक खराब टूर्नामेंट के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. फिर कोहली के लीडरशिप ग्रुप ने उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया.

2017 में भारत के श्रीलंका दौरे से पहले स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच शंकर बसु ने टीम में यो-यो इंटरमिटेंट रिकवरी टेस्ट लागू किया था. इसका मकसद खिलाड़ियों की फिटनेस, स्टैमिना और स्पीड को बेहतर बनाना था. यह वही दौर था जब युवराज अपने करियर के अंतिम पड़ाव में थे और उनके लिए टीम में वापसी चुनौतीपूर्ण हो गई थी. इस पूरे घटनाक्रम का असर युवराज के संन्यास और उनके खुद को कमतर महसूस करने से सीधे जुड़ा हुआ नजर आता है.
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