Indian rupee hits all time low: विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया शुक्रवार को ₹93.71 के अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ. एक्सपर्ट्स और एम्बिट कैपिटल ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो अगले एक साल में रुपया ₹98.90 तक गिर सकता है.

Indian rupee hits all time low: डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है. शुक्रवार को रुपया गिरकर 93.71 के स्तर पर बंद हुआ. यह अब तक का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले भी रुपया रिकॉर्ड गिरावट दर्ज कर चुका था. अब यह 94 के करीब पहुंच गया है. इस गिरावट ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है. निवेशक और एक्सपर्ट दोनों ही इसे गंभीर संकेत मान रहे हैं.
रुपये की कमजोरी के पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह वेस्ट एशिया में चल रहा तनाव है. इसके अलावा विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. इससे भी रुपये पर दबाव बढ़ा है. जब विदेशी निवेश कम होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है. इसका सीधा असर रुपये की कीमत पर पड़ता है. इसी कारण रुपया लगातार कमजोर हो रहा है.
Ambit Capital ने अपनी रिपोर्ट में बड़ी चेतावनी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमत 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती है, तो रुपये में और गिरावट आ सकती है. ऐसे हालात में रुपया करीब 98.90 तक पहुंच सकता है. यानी मौजूदा स्तर से और बड़ी कमजोरी देखने को मिल सकती है. अगले एक साल में 6.5 से 7.5 प्रतिशत गिरावट की संभावना जताई गई है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ता है. इससे देश पर डॉलर का दबाव बढ़ता है. जतीन त्रिवेदी के अनुसार, शॉर्ट टर्म में रुपया 93 से 94.25 के बीच कमजोर बना रह सकता है. वहीं दिलीप परमार ने कहा कि विदेशी निवेश की निकासी और महंगे तेल की वजह से रुपया दबाव में है. आने वाले समय में भी इसमें उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
इस बीच कच्चे तेल की कीमत भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. वहीं शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला. सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की बढ़त दर्ज की गई. हालांकि विदेशी निवेशकों ने एक दिन में हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. ऐसे में साफ है कि वैश्विक हालात और बाजार के दबाव के कारण रुपया फिलहाल कमजोर बना रह सकता है.
