iran blocks china cosco shipping: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे चीन की सरकारी कंपनी COSCO के दो बड़े जहाजों को सुरक्षा की गारंटी न देते हुए वापस लौटने पर मजबूर कर दिया है. यह कदम ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच उठाया गया है, जहाँ ईरान ने अमेरिका या इजरायल से जुड़े किसी भी व्यापारिक नेटवर्क के लिए अपना समुद्री रास्ता बंद करने की चेतावनी दी है.

iran blocks china cosco shipping: ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर समुद्री व्यापार पर भी दिखने लगा है. इसी बीच China से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. ईरान ने चीन की सरकारी शिपिंग कंपनी COSCO Shipping के दो बड़े कंटेनर जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद दोनों जहाजों को बीच समुद्र से ही वापस लौटना पड़ा. इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में चर्चा तेज हो गई है.
मरीन ट्रैफिक डेटा के अनुसार कंपनी के दो बड़े कंटेनर जहाज CSCL Indian Ocean और CSCL Arctic Ocean होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन रास्ते में उन्हें वापस मुड़ना पड़ा. माना जा रहा है कि इन जहाजों को सुरक्षित रास्ते की गारंटी नहीं मिल पाई थी. इसलिए दोनों जहाजों ने यू-टर्न लेकर समुद्र में ही दिशा बदल ली. युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार था जब किसी बड़े कंटेनर शिपिंग ऑपरेटर ने होर्मुज पार करने की कोशिश की थी.
दरअसल, युद्ध शुरू होने के बाद चीनी कंपनी ने खाड़ी देशों के लिए अपनी बुकिंग अस्थायी रूप से रोक दी थी. लेकिन बुधवार को कंपनी ने फिर से घोषणा की कि वह मध्य पूर्व के लिए शिपिंग बुकिंग शुरू करेगी. इसके बाद समुद्र में खड़े उसके कंटेनर जहाज आगे बढ़ने लगे. इसी दौरान दो जहाजों ने होर्मुज पार करने की कोशिश की. हालांकि ईरान की ओर से चेतावनी मिलने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा.
ईरान की सेना की एलिट फोर्स Islamic Revolutionary Guard Corps ने भी इस बारे में बयान दिया. उनका कहना है कि होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन कंटेनर जहाजों को चेतावनी देकर वापस भेजा गया. ईरान का कहना है कि यह समुद्री रास्ता उन जहाजों के लिए बंद है जो अमेरिका या इजरायल से जुड़े बंदरगाहों से आते-जाते हैं. ईरान के मुताबिक युद्ध की स्थिति में दुश्मन देशों या उनके सहयोगियों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इस बीच Donald Trump ने भी ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया है. उन्होंने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की चेतावनी देने की समय सीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी है. ट्रंप का दावा है कि युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत चल रही है. वहीं ईरान का कहना है कि वह अपनी शर्तों पर ही किसी समझौते के लिए तैयार होगा. क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और इसका असर समुद्री रास्तों, तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर साफ दिखाई दे रहा है.
