Iran protests: ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों के दावों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है. मानवाधिकार रिपोर्टों और खामेनेई के बयान के बाद ईरान की स्थिति पर दुनिया भर में बहस तेज हो गई है.

Iran protests: ईरान में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर दावे किए हैं. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, सरकारी कार्रवाई में अब तक 4,029 लोगों की मौत हो चुकी है. बताया गया है कि इनमें बड़ी संख्या आम प्रदर्शनकारियों की है. एजेंसी का कहना है कि सरकार ने विरोध को दबाने के लिए बेहद सख्त कदम उठाए. इसी दौरान 26,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में भी लिया गया. हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि ईरानी सरकार या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी ने नहीं की है. फिर भी यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है.
मानवाधिकार एजेंसी के मुताबिक मरने वालों में 3,786 लोग ऐसे थे, जो सीधे तौर पर प्रदर्शनों में शामिल थे. इसके अलावा 180 सुरक्षाकर्मियों की भी जान गई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान 28 बच्चों की मौत हुई है. वहीं 35 ऐसे लोग भी मारे गए, जो किसी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे और सामान्य नागरिक थे. एजेंसी का दावा है कि वह जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के नेटवर्क से जानकारी जुटाती है. उसका कहना है कि वास्तविक मौतों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है.
ईरान में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखने लगा है. जानकारी के अनुसार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची को स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक मंच में हिस्सा लेना था. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह निमंत्रण वापस ले लिया गया है. विश्व आर्थिक मंच ने साफ कहा कि हाल के हफ्तों में ईरान में आम नागरिकों की मौतों को देखते हुए इस साल ईरानी सरकार की मौजूदगी उचित नहीं होगी.
ईरानी विदेश मंत्री ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि उनकी भागीदारी को झूठे आरोपों और राजनीतिक दबाव के कारण रद्द किया गया. अरागची का आरोप है कि इस फैसले के पीछे इजराइल और अमेरिका समर्थित लॉबी का हाथ है. दूसरी ओर ईरानी सरकार ने अब तक मौतों का कोई स्पष्ट आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है. इससे स्थिति को लेकर और ज्यादा सवाल खड़े हो रहे हैं.

इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से मौतों को लेकर बयान दिया है. उन्होंने स्वीकार किया कि विरोध प्रदर्शनों में कई हजार लोगों की जान गई है. हालांकि उन्होंने इन मौतों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया. वहीं राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और संसद अध्यक्ष ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि हिंसा और आतंकवाद में शामिल लोगों को सजा दी जाएगी. साथ ही यह भी कहा गया कि जो लोग बहकावे में आ गए थे और जिनकी भूमिका सीमित थी, उनके साथ नरमी बरती जाएगी.
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