israel deploys iron dome in uae: इजरायल ने ईरान के मिसाइल खतरों से निपटने के लिए पहली बार अपना ‘आयरन डोम’ एयर डिफेंस सिस्टम संयुक्त अरब अमीरात में तैनात किया है, जिसने ईरान की दर्जनों मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया. इस सैन्य सहयोग से नाराज होकर ईरान ने यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर इजरायल की मदद करने का आरोप लगाते हुए उनसे भारी मुआवजे की मांग की है.

israel deploys iron dome in uae: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के दौरान एक अहम घटना सामने आई. इजरायल ने अपने सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा के लिए अपना मशहूर आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम वहां भेज दिया. यह पहली बार हुआ जब इजरायल ने यह सिस्टम किसी दूसरे देश को दिया. इस कदम को दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. यूएई को यह मदद इसलिए दी गई ताकि वह ईरान की ओर से आने वाली मिसाइलों से खुद को बचा सके.
युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से फोन पर बात की. बातचीत के बाद नेतन्याहू ने अपनी सेना को निर्देश दिया कि यूएई को एक आयरन डोम बैटरी भेजी जाए. इसके साथ मिसाइल रोकने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलें और कई प्रशिक्षित ऑपरेटर्स भी भेजे गए. ये सैनिक यूएई में तैनात होकर इस सिस्टम को चलाने में मदद करने लगे. इस फैसले के बाद यूएई की सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत हो गई.
यूएई में लगाए गए आयरन डोम सिस्टम ने जल्द ही अपना असर दिखाया. ईरान की ओर से दागी गई कई मिसाइलों को इस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया. रिपोर्टों के अनुसार दर्जनों मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोक लिया गया. इसी दौरान इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी ईरान में मौजूद कुछ छोटी दूरी की मिसाइल साइटों पर भी हमले किए. इन हमलों का मकसद यह था कि वहां से यूएई और दूसरे खाड़ी देशों पर हमला न हो सके. इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति कुछ हद तक मजबूत हो गई.
यूएई के अधिकारियों ने इजरायल की इस मदद की खुलकर सराहना की. उनका कहना है कि यह सहयोग हमेशा याद रखा जाएगा. यूएई के एक अधिकारी ने कहा कि इस घटना ने उन्हें यह समझा दिया कि मुश्किल समय में असली दोस्त कौन होता है. यूएई के पूर्व नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल अधिकारी तारेक अल‑ओतैबा ने भी इस पर टिप्पणी की. उन्होंने लिखा कि युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल ने यूएई को सैन्य सहायता, खुफिया जानकारी और कूटनीतिक समर्थन देकर मजबूत साझेदारी दिखाई है.
वहीं दूसरी ओर ईरान इस पूरे मामले से काफी नाराज है. ईरान का आरोप है कि यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कतर और जॉर्डन ने अमेरिका और इजरायल को अपने हवाई अड्डों का इस्तेमाल करने दिया. ईरान का कहना है कि इन देशों की वजह से उस पर हमले हुए. इसलिए अप्रैल 2026 में ईरान के संयुक्त राष्ट्र दूत ने इन पांचों देशों से मुआवजे की मांग की. ईरान का दावा है कि युद्ध में हुए भौतिक और नैतिक नुकसान की भरपाई इन देशों को करनी चाहिए. इस घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और सैन्य संबंधों में एक नया मोड़ देखने को मिला है.
