gujarat local body election: गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) को भारी नुकसान झेलना पड़ा है और वह तीसरे स्थान पर खिसक गई है. सूरत जैसे गढ़ में भी पार्टी की सीटें 27 से घटकर महज 4 रह गईं, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव की राहें उसके लिए कठिन नजर आ रही हैं.

gujarat local body election: गुजरात में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति की तस्वीर साफ कर दी है. इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ दिखाई है. राज्य में पिछले करीब तीन दशकों से भाजपा सत्ता में बनी हुई है. इसलिए उसकी जीत को बहुत बड़ा आश्चर्य नहीं माना जा रहा. लेकिन इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा आम आदमी पार्टी के कमजोर प्रदर्शन की हो रही है. इस चुनाव को पहले त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा था. उम्मीद थी कि AAP और कांग्रेस भाजपा को कड़ी टक्कर देंगे. लेकिन नतीजे सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि मुकाबला उतना मजबूत नहीं रहा जितना अनुमान लगाया जा रहा था.
स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों ने आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किल हालात का संकेत दिया है. पार्टी एक भी नगर निगम पर कब्जा नहीं कर सकी. इतना ही नहीं, 2021 में जो थोड़ी बढ़त पार्टी को मिली थी वह भी खत्म हो गई. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार AAP को कुल 476 सीटें ही मिल पाईं. शुरुआत में काउंटिंग के दौरान पार्टी ने दावा किया था कि वह दूसरे नंबर पर है. उस समय कांग्रेस को तीसरे स्थान पर बताया जा रहा था. लेकिन अंतिम नतीजों में स्थिति बदल गई. कांग्रेस AAP से आगे निकल गई और आम आदमी पार्टी तीसरे स्थान पर सिमट कर रह गई.
आंकड़ों को देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है. राज्य के 15 नगर निगमों की 1044 सीटों में से AAP को सिर्फ 6 सीटें मिलीं. 84 नगर पालिकाओं की 2030 सीटों में पार्टी को केवल 18 सीटें हासिल हुईं. वहीं 34 जिला पंचायतों की 1090 सीटों में AAP ने 57 सीटें जीतीं. 260 तालुका पंचायतों की 5234 सीटों में पार्टी को 395 सीटों पर सफलता मिली. इन नतीजों से साफ है कि पार्टी का असर कुछ सीमित इलाकों तक ही रहा. जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 5 सीटें जीतकर राज्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी. उस समय पार्टी को करीब 13 प्रतिशत वोट भी मिले थे.
इन चुनावों में सबसे बड़ा झटका सूरत नगर निगम में लगा. यहां 120 सीटों में से AAP को सिर्फ 4 सीटें मिलीं. कांग्रेस को 3 सीटें मिलीं. जबकि भाजपा ने 92 सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की. दिलचस्प बात यह है कि 2021 में इसी सूरत में आम आदमी पार्टी ने 27 सीटें जीतकर खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित किया था. उस समय कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी. लेकिन 2026 के चुनाव में यह बढ़त पूरी तरह खत्म हो गई. इससे साफ हो गया कि पार्टी की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही.
इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक तरह का सेमीफाइनल माना जा रहा था. अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने भी जोरदार प्रचार किया था. लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए. हालांकि कुछ आदिवासी इलाकों में पार्टी को थोड़ी सफलता जरूर मिली. चैतार वसावा और गोपाल इटालिया के प्रभाव वाले क्षेत्रों में कुछ पंचायत सीटें मिलीं. इनमें बगासरा तालुका पंचायत की जीत भी शामिल है. लेकिन कुल मिलाकर नतीजों ने यह दिखाया कि गुजरात में भाजपा की पकड़ अब भी मजबूत है. कांग्रेस अपनी मौजूदगी बनाए हुए है. वहीं आम आदमी पार्टी को अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत करने की जरूरत है. आने वाले 2027 के चुनाव पार्टी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं.
