israel us launch operation epic fury: इजरायल और अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर भीषण हमले शुरू कर दिए हैं, जिसका जवाब ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागकर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह जंग लंबी खिंच सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ेगा.

israel us launch operation epic fury: आज सुबह संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े सैन्य हमले शुरू किए हैं. जंग की शुरुआत होते ही पूरी दुनिया की नजरें इस टकराव पर टिक गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह लड़ाई तीन से चार दिन में भी रुक सकती है. लेकिन इसके 7 से 10 दिन तक चलने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है. कुछ एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि हालात बिगड़े तो यह जंग कई हफ्तों तक खिंच सकती है. ईरान की तरफ से साफ संदेश दिया गया है कि जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा. इसी वजह से हालात बहुत तेजी से बदल सकते हैं.
विदेश मामलों के जानकार वेल अवाद का कहना है कि जंग को रोकना अब आसान नहीं दिखता. ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से यह कहा गया है कि शुरुआत भले किसी ने की हो. लेकिन अंत वही करेंगे. रिटायर्ड मेजर जनरल विशंभर दयाल का मानना है कि अमेरिका पहले सीमित हमले करेगा. लेकिन अगर ईरान ने बड़ा जवाब दिया तो संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है. Atlantic Council से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका फिलहाल छोटी जंग की तैयारी में है. लेकिन अगर ईरानी नेतृत्व कमजोर नहीं पड़ा तो टकराव लंबा हो सकता है. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह संघर्ष जल्दी खत्म हो जाएगा. वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि उनका देश जंग और शांति दोनों के लिए तैयार है.
अमेरिका और इज़रायल कई महीनों से इस टकराव की तैयारी कर रहे थे. अमेरिका ने मध्य पूर्व क्षेत्र में भारी सैन्य ताकत तैनात कर रखी है. फाइटर जेट्स. एयर टैंकर. क्रूज मिसाइलें और आधुनिक लड़ाकू विमान पहले से मौजूद हैं. ट्रंप ने खुलकर कहा है कि ईरान की मिसाइल ताकत को खत्म किया जाएगा. विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका के हमलों में परमाणु ठिकाने. खुफिया केंद्र और सत्ता से जुड़े अहम ठिकाने निशाने पर हैं. माना जा रहा है कि अमेरिका का मकसद ईरान के मौजूदा नेतृत्व को कमजोर करना है. ताकि आगे की बातचीत में दबाव बनाया जा सके.
इज़रायल की तरफ से इस अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया है. इज़रायल ने पहले हमला इसलिए किया क्योंकि उसे ईरान की मिसाइल और ड्रोन कार्रवाई का डर था. इज़रायली लड़ाकू विमानों ने ईरान के करीब 30 सैन्य ठिकानों पर वार किया. देशभर में आपात हालात घोषित कर दिए गए हैं. लोग बंकरों में शरण ले रहे हैं. इजरायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने इसे सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है. अस्पतालों में भी इमरजेंसी व्यवस्था लागू कर दी गई है. इजरायल की मिसाइल सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय कर दी गई है.
ईरान ने भी पलटवार की पूरी तैयारी कर ली है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं. जिनमें बहरीन, कुवैत, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात शामिल बताए जा रहे हैं. इज़रायल पर भी दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकाने हैं. वह हूती और हिज़्बुल्लाह जैसे गुटों से भी मदद ले सकता है. अगर यह जंग लंबी चली तो तेल की कीमतें बढ़ेंगी. मध्य पूर्व में अस्थिरता और गहराएगी. भारत भी हालात पर नजर बनाए हुए है. क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं.
