हर एक व्यक्ति समाज में अपनी इज्जत बनाने में अपनी पूरी जिंदगी लगा देता है. अपनी इज्जत के लिए वह बेटी की शादी अपनी हैसियत से ज्यादा पैसे लगा के कर देता है. लेकिन एक बार सोच कर देखिए क्या असल में समाज यहीं है. व्यक्ति अपने आप पर ध्यान देने के बजाए दूसरे व्यक्ति को खुश करने में लगा होता है. समाज का काम दूसरे व्यक्ति पर केवल बातें करना नहीं बल्कि साथ देना है. सोच कर देखिए… वेलेंटाइन डे पर एक दूसरी की मर्जी के साथ यानी कसेंट के साथ घूमने वाले लोगों के साथ यह बंटी बबली करने वाला समाज तुरंत बीच में आ जाता है. अगर कोई गांव में साथ में पकड़ा जाए तो पंचायत तक बैठा दी जाती है, लेकिन वहीं एक लड़की का रेप हो तो आरोपी से एक लाख रुपये लेकर मामले का निपटारा कर दिया जाता है और आरोपी से लिए 20 हजार के पैसों में मुर्गा और दारू पार्टी की जाती है. ऐसा हम लेकिन खुद नहीं कह रहे है, बल्कि एक केस के आने के बाद यह मुद्दा उठना जरूरी हो गया है.
दरअसल, झारखंड के गुमला में एक 3 साल की बच्ची के साथ में एक व्यक्ति ने हैवानियत को अंजाम दिया है. आरोपी परिवार को अच्छी तरीके से जानता था. उसने बच्ची की मां को कहा- लाओ बच्ची में संभाल लेता हूं. तुम काम कर लो. इस मामले से लेकिन एक और सवाल उठता है कि आखिर बच्ची ने पहना क्या था. क्योंकि कई बार जब कांटेंट क्रिएटर लोगों से राय लेते हैं तो अकसर लोग यहीं बोलते दिखाई देते हैं कि लड़की के कपड़े ऐसे तो वैसे. जबकि आरोपी की मानसिकता पर कोई दोष नहीं लगाता है. इस केस से देखा जाए तो 3 साल की बच्ची के साथ जो हैवानियत अंजाम दी गई है, उस पर न तो देर रात बाहर जाना या छोटे कपड़े वाली बात लगती है.बाकी लोग खुद समझदार है. ऐसा केस पहली बार नहीं आया है पहले भी ऐसे बहुत केस आए, लेकिन इस मुद्दे में सबसे मुख्य आरोपी दुष्कर्म करने वाले नहीं बल्कि लोग और उसके पास का समाज है.
बच्ची की मां जब उसके रोने की आवाज सुनकर आती है तो देखती है कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट से खून निकल रहा है. वहीं, आरोपी साइड में लेटा हुआ है. मुद्दा उठा और पंचायत तक गया. पंचायत ने गांव के बाहर मुद्दा न जाए इसके लिए आरोपी को 1 लाख रुपये देने की सजा सुनाई और छोड़ दिया. हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि आरोपी से शुरू में 20 हजार रुपये जमा करने के लिए जो कहे, वह पंचायत ने मुर्गा पार्टी और दारू में उड़ा दिए. एक तरफ बच्ची दर्द से तड़प रही है और दूसरी तरफ पंचायत रेप केस को अंजाम देने वाले व्यक्ति से पैसे लेकर पार्टी कर रही है.
हाल ही में एक केस आया था जहां एक परिवार ने केवल एक-आधा चीजें श्राद्ध में नहीं खिलाई थी तो पंचायत ने उसे समाज से बर्खास्त कर दिया. एक तरफ जब बच्ची के साथ रेप हुआ तो पैसे लेकर मुर्गा पार्टी की गई. क्या ये समाज सच में समाज कहलाने के लायक है? एक बार खुद सोचिए. हालांकि, मां ने सूझ बूझ दिखाई और पुलिस को इस मामले की जानकारी दी , जिसके बाद पुलिस ने आरोपी और पार्टी करने वाले लोगों को गिरफ्तार कर लिया.
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