Book fair delhi 2026: भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा का सबसे बड़ा उत्सव माने जाने वाले 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का भव्य उद्घाटन राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया गया। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने पारंपरिक टैम्बोरिन बजाकर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया, जिसने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा और भारतीय परंपरा से जोड़ दिया।इस अवसर पर देश-विदेश से आए लेखक, प्रकाशक, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, छात्र, शोधकर्ता और पुस्तक प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, पढ़ने की संस्कृति और वैश्विक बौद्धिक नेतृत्व की दिशा में बढ़ते कदमों का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
53 वर्षों की निरंतरता विश्वसनीय और प्रतिष्ठित मंच बना दिल्ली पुस्तक मेला
उद्घाटन संबोधन में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 53 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला आज केवल एक प्रदर्शनी भर नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक प्रकाशन जगत का एक प्रतिष्ठित, विश्वसनीय और प्रभावशाली मंच बन चुका है।दिल्ली पुस्तक मेला भारत की बौद्धिक आत्मा का उत्सव है। यह वह मंच है जहाँ विचार, भाषा, संस्कृति और ज्ञान का संगम होता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह मेला लेखकों और पाठकों के बीच संवाद को सशक्त बनाता है तथा नई पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम है।
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भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन केंद्र
अपने भाषण के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन और पुस्तक व्यापार केंद्र बनकर उभरा है। यह उपलब्धि केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक शक्ति का प्रमाण है। भारत में हर वर्ष लाखों नई पुस्तकें प्रकाशित होती हैं, जिनमें शैक्षणिक, साहित्यिक, तकनीकी, वैज्ञानिक और बाल साहित्य शामिल है।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका
एशिया में अग्रणी भूमिका निभा रहा है भारतीय भाषाओं में सामग्री का वैश्विक विस्तार कर रहा है डिजिटल और प्रिंट दोनों क्षेत्रों में नवाचार कर रहा है, भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि ज्ञान का वैश्विक निर्माता और निर्यातक बन चुका है।
पढ़ोगे, तो नेतृत्व करोगे – पीएम मोदी के विचारों का उल्लेख
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा कहते हैं पढ़ोगे, तो नेतृत्व करोगे।” सरकार का मानना है कि पढ़ने की संस्कृति (Reading Culture) ही किसी राष्ट्र की नेतृत्व क्षमता, नवाचार शक्ति और लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करती है।
पढ़ने की संस्कृति सरकार की प्राथमिकता
स्कूलों और कॉलेजों में लाइब्रेरी नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है बच्चों और युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण कंटेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है पढ़ना केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और विचार नेतृत्व का आधार है।
वीर सुरेंद्र साईं और चाबिल साईं के बलिदान पर आधारित पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ओडिशा के महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साईं और उनके भाई चाबिल साईं के बलिदान का विशेष रूप से उल्लेख किया।19वीं सदी की शुरुआत में संबलपुर क्षेत्र में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक ऐतिहासिक जनसंघर्ष हुआ था, इस संघर्ष में कुडोपाली क्षेत्र में वीर सुरेंद्र साईं के भाई चाबिल साईं ने अपने प्राणों की आहुति दी।बलिदान की कहानी अब पुस्तक रूप में इस ऐतिहासिक बलिदान पर आधारित एक पुस्तक अब प्रकाशित की गई है, जिसका अनुवाद कई विदेशी भाषाओं में किया गया है, ताकि भारत का स्वतंत्रता संग्राम वैश्विक पाठकों तक पहुँचे इस पहल के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) को बधाई दी और कहा कि ऐसी पुस्तकों के माध्यम से हम अपने भूले-बिसरे नायकों को नई पीढ़ी से जोड़ सकते हैं।
डिजिटल इंडिया के तहत ज्ञान का लोकतंत्रीकरण
डिजिटल युग पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है ज्ञान को सुलभ समावेशी और सर्वसुलभ बनाना, उन्होंने कहा कि आज भाषा बाधा नहीं, बल्कि ज्ञान का सेतु बननी चाहिए।
राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी की बड़ी पहल
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि राष्ट्रीय ई-लाइब्रेरी के माध्यम से 23 से अधिक भारतीय भाषाओं में 6,000 से ज्यादा मुफ्त ई-बुक्स आम जनता के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं, इन ई-बुक्स में टेक्स्ट-टू-स्पीच सुविधा दिव्यांगों के लिए विशेष फीचर्स मोबाइल और टैबलेट पर आसान पहुंच जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। यह पहल डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करती है और ज्ञान को हर वर्ग तक पहुँचाती है।
‘वंदे मातरम’ की 150वीं जयंती सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक
कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का भी विशेष उल्लेख किया गया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ऑल इंडिया रेडियो पर महान गायक ओंकारनाथ ठाकुर द्वारा गाया गया ‘वंदे मातरम’, केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं थी बल्कि वह स्वतंत्र भारत के जन्म का सांस्कृतिक उत्सव था।” यह प्रस्तुति भारत की राष्ट्रीय चेतना, आत्मगौरव और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक है।
पुस्तक मेले में ऐतिहासिक विरासत का प्रदर्शन
उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर को दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में प्रदर्शनी के रूप में आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जा रहा है ताकि युवा पीढ़ी अपने अतीत से जुड़ सके और भविष्य की दिशा तय कर सके।
नई पीढ़ी के लिए पुस्तक मेले का महत्व
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी पुस्तकें अप्रासंगिक नहीं हुई हैं बल्कि उनका महत्व और बढ़ा है स्क्रीन के दौर में भी कागज़ की किताबें गहराई से सोचने एकाग्रता विकसित करने और विचारों को स्थायित्व देने का सबसे सशक्त माध्यम हैं वैश्विक सहभागिता और भारतीय भाषाओं का विस्तार 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में कई देशों के प्रकाशक अंतरराष्ट्रीय लेखक विदेशी दूतावास भी भाग ले रहे हैं, यह मेला भारतीय भाषाओं के वैश्विक विस्तार अनुवाद साहित्य को बढ़ाव और सांस्कृतिक कूटनीति का भी एक प्रभावी मंच बन रहा है।
ज्ञान से नेतृत्व की ओर भारत
53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन केवल एक आयोजन नहीं बल्कि भारत की बौद्धिक यात्रा, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा का स्पष्ट संकेत है। धर्मेंद्र प्रधान के शब्दों में जब राष्ट्र पढ़ता है, तब वह आगे बढ़ता हैदिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 इसी विचार को साकार करता हुआ अतीत की विरासत, वर्तमान की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं के बीच एक सशक्त सेतु बनकर उभर रहा है।
