Lucknow News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एंटी पेपर लीक बिल पारित होने पर युवाओं को बधाई देते हुए इसे पीएम मोदी के नेतृत्व में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है. सीएम ने विश्वास जताया कि इस सख्त कानून से देश-प्रदेश की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली के प्रति युवाओं का भरोसा और अधिक मजबूत होगा. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद द्वारा पारित यह कानून देश की भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.
प्रश्नपत्र लीक माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाएगा बिल
सीएम ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं प्रतिभाशाली युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती हैं और उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं. ऐसे में यह कानून न केवल नकल और प्रश्नपत्र लीक माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाएगा, बल्कि युवाओं के मन में परीक्षा प्रणाली के प्रति विश्वास भी मजबूत करेगा.
मील का पत्थर सिद्ध होगा बिल
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह विधेयक युवाओं के हितों की रक्षा करने वाला है और भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश के करोड़ों युवाओं को इससे बड़ा लाभ मिलेगा तथा उनकी प्रतिभा को उचित अवसर प्राप्त होगा.
लोकसभा में हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पारित
लोकसभा में हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पारित कर दिया गया. लंबी चर्चा के बाद ध्वनि मत से यह बिल पास हो गया. इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर संसद में जमकर हंगामा हुआ. इस बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर नोकझोंक भी हुई.
जानिए क्या है नया एंटी पेपर लीक कानून?
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के तहत भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने, नकल कराने या अन्य अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया है. नए कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल की सजा दी जा सकती है. इसके साथ ही दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा.
क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधित कानून में संगठित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा से जुड़े अपराध करने वाले गिरोहों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है. ऐसे मामलों में न्यूनतम सात साल और अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास के साथ 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
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