केरल में निपाह वायरस का मामला सामने आया है. दरअसल, 45 साल के एक व्यक्ति में इस वायरस की पुष्टि की गई है. कोझिकोड में हुए जांच के दौरान इस वायरस की पुष्टि हुई है. मामले के सामने आने के बाद में स्वास्थ्य अधिकारियों ने तुरंत कदम उठाते हुए व्यक्ति के कांटेक्ट में आए लोगों की पहचान करनी शुरू की. बता दें कि निपाह वायरस के आए केस में अभी तक 75 प्रतिशत मरीज की मौत हो चुकी है.
वायरस से संक्रमित मरीज को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. हालांकि, राहत की बात यह हैं कि अभी तक 77 कांटेक्ट में आए लोगों में से किसी में भी वायरस के लक्षण देखने को नहीं मिले हैं. कांटेक्ट में आए 77 लोगों में से 14 मरीज परिवार के सदस्य है. वहीं, 5 दोस्त और 58 स्वास्थ्य कर्मी शामिल है. मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 लोगों को अति जोखिम वाली कैटेगरी में रखा गया है.
क्या होता है लक्षण
दरअसल, व्यक्ति को 14 दिन बाद इस वायरल का लक्षण दिखाई देता है. शुरूआत में व्यक्ति को मामूली बुखार, मांसपेशी में दर्ज, कमजोरी, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी होती है. धीरे-धीरे वायरस दिमाग में चला जाता है और ब्रेन इन्फ्लेमेशन हो जाता है. इसी कारण से अधिकतर केसों में व्यक्ति की मौत हो चुकी है.
कैसे होता है यह वायरस
वायरस इंसान में एक नहीं बल्कि कई तरीके से फैलता है. इसका मेन सोर्स फल खाने वाले चमगादड़ होते है. दरअसल, जब इंफेक्टेड चमगादड़ फल पर पेशाब या मल कर देता है और अनजाने में कोई व्यक्ति या सूअर कांटेक्ट में आता है, तो लोगो के शरीर में यह वायरल फैल जाता है. यहां तक की यह वायरस इंफेक्टेड फल का रस पीने से भी फैलता है.
अगर इंफेक्टेड मरीज की लार, खून या किसी तरीके का दूसरा स्त्राव दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आता है, तो उसमें इंफेक्शन का खतरा काफी बढ़ जाता है. 1999 में पहली बार इसका केस मलेशिया और सिंगापुर से आया थे. धीरे-धीरे बांग्लादेश भारत जैसे कई देशों में इसका प्रकोप फैलने लगा था.
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