नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ने हाल ही में दिल्ली के स्वास्थ्य स्थिति को लेकर काफी गंभीर स्थिति को पेश किया है. रिपोर्ट के अनुसार राजधानी के हेल्थ से संबंधित कई चौंकाने वाली बातें बोली गई है. दरअसल, रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में एक तरफ मोटापे के मामले कम हुए है, तो वहीं दूसरी तरफ कुपोषण और डायबिटीज से संबंधित केस बढ़ते जा रहे हैं.
दरअसल, NFHS-6 की जारी रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों में मोटापा कम हुआ है. पुरुषों का मोटापा दर 38 प्रतिशत से घटकर 34.8 प्रतिशत हुआ है. वहीं, महिलाओं में भी मोटापे के मामले में कमी देखने को मिली है. हालांकि, एक पक्ष सकारात्मक है तो दूसरा पक्ष नकारात्मक है.
बता दें नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं और पुरुषों में कुपोषण का दर बढ़ गया है. साथ ही डायबिटीज जैसी बीमारी भी काफी बढ़ गई है. महिलाओं में कुपोषण का दर 10 प्रतिषत से 12 प्रतिशत हो गया है. तो वहीं, पुरुषों में यह आंकड़ा 9 से 14.9 प्रतिशत हो गया है.
हालांकि, उससे भी ज्यादा चिंताजनक यह हैं कि बच्चों में भी पोषण की स्थिति काफी चिंताजनक है. छह महीने तक मां के दूध पीकर रहने वाले बच्चों की संख्या 64.3 से घटकर 48.3 हो गई है. इसके अलावा भी कई चौंकाने वाली और चिंताजनक स्थिति देखने को मिली है. बच्चों में कुपोषण होने का प्रतिशत बढ़ रहा है. 6 से 23 महीने में अब केवल 11.2 प्रतिशत बच्चों की ही प्रोपर आहार मिल रहा है. पहले यह आंकड़ा 14 प्रतिशत था.
रिपोर्ट निकलने के बाद में विशेषज्ञों का कहना हैं कि लोग कुपोषण होने को मोटापा कम होना मान रहे हैं. जो कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. खराब खानपान की वजह से वजन कम हो जाता है, जिसके कारण लोग कुपोषण को वजन कम घटना मान लेते हैं. शरीर के वजन के हिसाब से ही शरीर में पोषक तत्व होने चाहिए.
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