TRF Fake Claim Exposed: पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एनआईए ने खुलासा किया है कि इस हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा साजिद सैफुल्लाह जट्ट है, जो ‘कश्मीर फाइट’ और ‘जस्टिस लीग ऑफ इंडिया’ जैसे सोशल मीडिया व टेलीग्राम नेटवर्क्स के जरिए ऑनलाइन प्रोपेगेंडा चला रहा था.

TRF Fake Claim Exposed: पहलगाम आतंकी हमले के बाद जांच एजेंसियों ने सिर्फ हमलावरों की तलाश ही नहीं शुरू की, बल्कि सोशल मीडिया पर चल रहे संदिग्ध नेटवर्क पर भी नजर रखी. हमला होने के कुछ घंटों बाद ही “कश्मीर फाइट” नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल से भड़काऊ पोस्ट डाली गई थी. इसमें गैर-स्थानीय लोगों को निशाना बनाने जैसी बातें लिखी गई थीं. जब एजेंसियों ने इस पोस्ट की जांच शुरू की, तो कई डिजिटल सुराग पाकिस्तान तक पहुंच गए. शुरुआती जांच में ही यह साफ होने लगा कि हमले के पीछे जमीन के साथ-साथ ऑनलाइन प्रचार का भी बड़ा खेल चल रहा था.
जांच के दौरान एजेंसियों को “जस्टिस लीग ऑफ इंडिया” नाम का एक टेलीग्राम चैनल भी मिला. इस चैनल पर लगातार कट्टरपंथ और हिंसा से जुड़े संदेश शेयर किए जा रहे थे. जांच में पता चला कि इस चैनल को चलाने वाले अकाउंट उन्हीं नेटवर्क्स से जुड़े थे, जिनका संबंध “कश्मीर फाइट” हैंडल से था. इसके बाद एजेंसियों ने इस पूरे मामले को सिर्फ आतंकी हमला नहीं, बल्कि एक बड़े डिजिटल प्रोपेगेंडा अभियान के तौर पर भी देखना शुरू कर दिया. एनआईए की चार्जशीट में इन ऑनलाइन नेटवर्क्स का विस्तार से जिक्र किया गया है.
हमले के तुरंत बाद आतंकी संगठन TRF ने इसकी जिम्मेदारी ली थी. उसके चैनलों पर इसे लेकर कई संदेश भी पोस्ट किए गए थे. लेकिन कुछ दिन बाद अचानक संगठन ने अपना बयान बदल दिया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा हमले की निंदा किए जाने के दिन TRF के टेलीग्राम चैनल पर नया बयान जारी हुआ. इसमें कहा गया कि उनका अकाउंट हैक हो गया था और जिम्मेदारी लेने वाला पुराना पोस्ट फर्जी था. संगठन ने पूरे हमले को “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” बताने की कोशिश की और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए.
हालांकि जांच एजेंसियों को मिले डिजिटल सबूत TRF के दावों से बिल्कुल अलग कहानी बता रहे थे. तकनीकी जांच में सामने आया कि जिम्मेदारी लेने वाला पोस्ट और बाद में किया गया इनकार, दोनों पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क के जरिए अपलोड किए गए थे. जिन IP एड्रेस का इस्तेमाल हुआ, उनकी लोकेशन पाकिस्तान के पंजाब इलाके में मिली. वहीं “कश्मीर फाइट” से जुड़ी गतिविधियों का नेटवर्क CMPak Limited नाम की इंटरनेट सेवा से जुड़ा पाया गया, जिसकी लोकेशन खैबर पख्तूनख्वा बताई गई. इससे एजेंसियों को शक और मजबूत हो गया कि पूरा ऑनलाइन नेटवर्क पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहा था.
जांच एजेंसियों का मानना है कि सोशल मीडिया और टेलीग्राम चैनलों के जरिए माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी. हमले के बाद भ्रम फैलाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया नैरेटिव तैयार करने की कोशिश हुई. मारे गए आतंकियों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और तकनीकी सबूतों से एजेंसियों को पूरे नेटवर्क की तस्वीर समझ में आई. जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड साजिद सैफुल्लाह जट्ट उर्फ अली भाई था, जो पाकिस्तान में बैठकर इस नेटवर्क को चला रहा था.
