Brahmos Indonesia Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से इंडोनेशिया के तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं, जहां दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम की खरीद और रक्षा कूटनीति को लेकर बेहद अहम समझौता हो सकता है.

Brahmos Indonesia Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत जल्द इंडोनेशिया के तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं. उनकी यह तीन दिनों की यात्रा 6 जुलाई से शुरू होने वाली है. दोनों देशों के रणनीतिक और रक्षा संबंधों के लिहाज से इस दौरे को बेहद अहम और ऐतिहासिक माना जा रहा है. इस यात्रा के दौरान सबसे बड़ा आकर्षण भारत और इंडोनेशिया के बीच ‘ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ के सौदे को लेकर होने वाली बातचीत है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस दौरे पर दोनों देश इस महाडील को अंतिम रूप दे सकते हैं और खरीद पर पक्की मुहर लगा सकते हैं.
मार्च के पुराने समझौते से बहुत आगे बढ़ेगी बात
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार बातचीत चल रही है. रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस दौरे पर होने वाली चर्चा मार्च के महीने में तय हुए शुरुआती सिंगल-सिस्टम समझौते से काफी आगे जाएगी. इस बार दोनों देश सिर्फ मिसाइल खरीदने तक सीमित नहीं रहेंगे. बातचीत के एजेंडे में तटीय और मोबाइल लॉन्चर, आधुनिक रडार सिस्टम, सैनिकों की ट्रेनिंग, मिसाइल का मेंटेनेंस और एक बहुत बड़ा व्यापक सपोर्ट पैकेज भी शामिल होने की संभावना है.
इंडोनेशिया को मिलेगी मिसाइल के साथ पूरी सुरक्षा प्रणाली
इस डील की सबसे खास बात यह है कि भारत सिर्फ अपनी मिसाइलें इंडोनेशिया को नहीं बेचेगा. बल्कि, इंडोनेशिया को मिसाइल के साथ-साथ उसकी सुरक्षा, इस्तेमाल और रख-रखाव की पूरी की पूरी आधुनिक प्रणाली सौंपी जाएगी. इसका मतलब यह हुआ कि इंडोनेशिया की सेना को इस घातक मिसाइल सिस्टम को ऑपरेट करने के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. भारत उन्हें पूरी तकनीक और ट्रेनिंग की ऐसी किट देगा जिससे वे खुद अपनी तटीय सीमाओं की सुरक्षा बहुत ही मजबूती के साथ कर सकेंगे.
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की मजबूत होती डिफेंस कूटनीति
भारत की बनाई हुई ब्रह्मोस मिसाइल इस समय इंडो-पैसिफिक यानी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी रक्षा कूटनीति का एक बहुत बड़ा और मजबूत स्तंभ बनकर उभरी है. भारत ने इससे पहले साल 2022 में फिलीपींस के साथ तट-आधारित ब्रह्मोस सिस्टम के लिए 375 मिलियन डॉलर का एक बड़ा समझौता किया था. उस मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी साल 2024 में शुरू भी हो चुकी है, जो इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का पहला विदेशी निर्यात था. फिलीपींस के बाद अब वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ भी भारत की बातचीत बहुत आगे निकल चुकी है.
दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में से एक है ब्रह्मोस
ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस के जॉइंट वेंचर यानी संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है. यह आज की तारीख में दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से चलने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है. फिलीपींस के बाद अगर इंडोनेशिया भी इस मिसाइल को खरीदने का फाइनल ऑर्डर दे देता है, तो यह इस स्वदेशी मिसाइल सिस्टम का दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय निर्यात होगा. इस महत्वपूर्ण डील के पूरा होने से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के इन दो बड़े और ताकतवर देशों के बीच दोस्ती और रक्षा संबंध पहले से कहीं ज्यादा गहरे हो जाएंगे.
समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक तालमेल को मिलेगी नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस तीन दिनों के इंडोनेशिया दौरे का मुख्य फोकस समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है. इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना और हिंद महासागर के साथ-साथ आसियान (ASEAN) क्षेत्र में आपसी तालमेल को बढ़ाना भी इस यात्रा का बड़ा लक्ष्य है. दोनों ही देश इस पूरे समुद्री इलाके में सुरक्षा और स्थिरता का एक नया अध्याय लिखने की पूरी तैयारी कर चुके हैं. पीएम मोदी के इस दौरे पर पूरी दुनिया, खासकर चीन की नजरें टिकी हुई हैं.
