prashant kishor job promise bankipur: इस स्टोरी में जानिए बांकीपुर उपचुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर के 10 हजार नौकरियों वाले वादे का पूरा गणित और जानिए कि अगर देश का हर सांसद-विधायक यह फॉर्मूला अपनाए तो कैसे 5 करोड़ नौकरियां पैदा हो सकती हैं.

prashant kishor job promise bankipur: जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल की है. जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने बांकीपुर के 10 हजार युवाओं को प्राइवेट नौकरियां दिलाने का एक बड़ा वादा किया है. प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के स्थानीय युवाओं से उनका बायोडेटा यानी सीवी मांगना भी शुरू कर दिया है. अगर प्रशांत किशोर के इस मॉडल को आधार माना जाए और देश का हर सांसद या विधायक अपने इलाके में इसी तरह पहल करे, तो अगले दो से तीन सालों में देश भर में लगभग 5 करोड़ नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं. आइए समझते हैं कि इस विचार के पीछे का पूरा गणित और समीकरण आखिर क्या है.
क्या है जनप्रतिनिधियों और प्राइवेट नौकरियों का गणित?
प्रशांत किशोर के इस अनोखे नौकरी वाले मॉडल को एक आसान गणित से समझा जा सकता है. हमारे देश में फिलहाल 545 लोकसभा और 245 राज्यसभा सांसद मौजूद हैं. इसके अलावा देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 4,123 विधायक हैं. अगर हर सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्र के 10 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाता है, तो देश के सभी सांसदों की कोशिशों से लगभग 70 लाख युवाओं को नौकरियां आसानी से मिल सकती हैं. इसी तरह अगर हर विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में 10 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने का बीड़ा उठाए, तो देश भर में करीब 4.1 करोड़ प्राइवेट नौकरियां तैयार हो सकती हैं. सांसदों और विधायकों की इस पहल को मिला दें, तो देश में कुल 4.9 करोड़ यानी लगभग 5 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी.
केंद्र सरकार के पास वर्तमान में कितना है कार्यबल?
अगर हम केंद्र सरकार के मंत्रालयों और सरकारी विभागों में मौजूदा नौकरियों के आंकड़े देखें, तो वर्ष 2026 तक पूरे केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों को मिलाकर कुल 35.8 लाख नौकरियां हैं. वहीं अगर हम केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों यानी सरकारी कंपनियों की बात करें, तो वर्ष 2025 तक इनमें काम करने वाले कुल कर्मचारियों की संख्या 15.4 लाख थी. इस आंकड़े के अंदर भारतीय रेलवे में काम करने वाले लाखों कर्मचारी भी शामिल हैं. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि सिर्फ सरकारी तंत्र के भरोसे देश के हर युवा को रोजगार दे पाना मुमकिन नहीं है.
देश में कुल कितने सरकारी कर्मचारी काम कर रहे हैं?
विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक भारत में इस वक्त कुल मिलाकर लगभग 1.90 करोड़ सरकारी कर्मचारी हैं. इनमें से करीब 1.45 करोड़ कर्मचारी देश की अलग-अलग राज्य सरकारों के अधीन काम करते हैं. वहीं केंद्र सरकार के पास सीधे तौर पर लगभग 45 लाख कर्मचारियों का कार्यबल मौजूद है. अगर 140 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले इस विशाल देश से तुलना करें, तो यह संख्या काफी कम नजर आती है. देश की कुल आबादी का करीब डेढ़ प्रतिशत से भी कम हिस्सा इस समय सरकारी नौकरी में है. इसी वजह से देश में प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों की भूमिका और उनका महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है.
भारत की बड़ी आबादी के लिए सरकारी नौकरियां कितनी काफी हैं?
जानकारों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों की संख्या काफी कम है. एक आदर्श व्यवस्था में देश की कुल आबादी का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा सरकारी सेवाओं में होना चाहिए. इस हिसाब से देखा जाए तो देश में करीब 5 से 7 करोड़ सरकारी नौकरियों की जरूरत है. अकेले केंद्र सरकार के स्तर पर ही 2 करोड़ से कम सरकारी कर्मचारी होना किसी भी व्यवस्था के लिए नाकाफी साबित होता है. यही कारण है कि सरकारी नौकरियों पर निर्भरता कम करके निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना बेहद जरूरी हो गया है.
क्या प्रशांत किशोर का यह मॉडल देश में क्रांति ला सकता है?
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के युवाओं से बायोडेटा मांगकर एक नया राजनीतिक और सामाजिक ट्रेंड शुरू कर दिया है. अगर यह प्रयोग बांकीपुर में सफल रहता है, तो देश के अन्य नेताओं पर भी अपने क्षेत्र में ऐसा करने का नैतिक दबाव बनेगा. जनप्रतिनिधि अब सिर्फ भाषण देने तक सीमित न रहकर सीधे रोजगार जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं. प्राइवेट कंपनियों के साथ तालमेल बिठाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं. अगर देश का हर नेता अपने इलाके की इस जिम्मेदारी को समझे, तो देश से बेरोजगारी की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है.
