strait of hormuz drone attack: इस स्टोरी में जानिए कैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यूएई के तेल टैंकरों पर ड्रोन हमला हुआ, यूएई ने ईरान पर ‘समुद्री डकैती’ का आरोप क्यों लगाया और मिडिल ईस्ट में शांति के लिए जेरेड कुशनर का नया दौरा क्यों अहम है.

strait of hormuz drone attack: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़ा तनाव पैदा हो गया है. संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने ईरान पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. यूएई का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उसके दो सरकारी तेल टैंकरों पर ईरान ने ड्रोन से हमला किया है. यूएई के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस पूरी घटना को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया. हालांकि इस हमले में किसी भी शख्स के मारे जाने या घायल होने की खबर नहीं है. लेकिन इस घटना ने दुनिया भर के देशों के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है.
होर्मुज की खाड़ी में आखिर क्या हुआ?
यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने बताया कि गुरुवार शाम को उनके दो जहाजों को निशाना बनाया गया. ये जहाज जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे थे, तभी उन पर अचानक ड्रोन से हमला कर दिया गया. राहत की बात यह रही कि हमले के तुरंत बाद स्थिति पर काबू पा लिया गया और किसी कर्मचारी को नुकसान नहीं पहुंचा. ब्रिटेन की नौसेना के यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने भी इस ड्रोन अटैक की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि जहाजों को मामूली नुकसान पहुंचा है और वे अब सुरक्षित हैं.
यूएई ने ईरान को क्यों ठहराया जिम्मेदार?
यूएई के विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को दोषी ठहराया है. उन्होंने कहा कि ईरान की यह हरकत अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है. यूएई का कहना है कि व्यापारिक जहाजों पर हमला करना और होर्मुज के रास्ते को ब्लैकमेलिंग का जरिया बनाना पूरी तरह गलत है. विदेश मंत्रालय ने इसे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की समुद्री डकैती बताया. यूएई का मानना है कि इस तरह के कदमों से पूरे इलाके की शांति और दुनिया भर की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. हालांकि, ईरान की तरफ से इस पर कोई बयान नहीं आया है.
दुनिया के लिए क्यों बेहद अहम है होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को खुले समंदर से जोड़ने वाला बेहद संकरा और महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. पूरी दुनिया में इस्तेमाल होने वाले तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. अगर इस इलाके में कोई भी सैन्य तनाव या जंग जैसा माहौल बनता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई रुक सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम अचानक बहुत तेजी से भाग सकते हैं. यही वजह है कि होर्मुज में किसी भी तरह की हलचल से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था टेंशन में आ जाती है.
गाजा में शांति के लिए जेरेड कुशनर का दौरा
दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट में जारी गाजा संकट को सुलझाने के लिए कोशिशें तेज हो गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर अगले हफ्ते मिडिल ईस्ट की यात्रा पर जाने वाले हैं. उनका मुख्य मकसद गाजा में जारी संघर्ष को हमेशा के लिए खत्म कराना और शांति समझौते को आगे बढ़ाना है. हाल ही में ट्रंप प्रशासन की ओर से पेश किए गए शांति प्लान का इजरायल ने विरोध किया था. इसी गतिरोध को दूर करने के लिए कुशनर खुद बातचीत की कमान संभालने जा रहे हैं.
क्या है आगे का पूरा प्लान?
इस अहम यात्रा में जेरेड कुशनर अकेले नहीं हैं. उनके साथ ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के वरिष्ठ अधिकारी निकोलाय म्लादेनोव और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी मौजूद रहेंगे. यह हाई-प्रोफाइल टीम रविवार को सबसे पहले इजरायल पहुंचेगी और वहां के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेगी. इसके बाद सभी लोग मिस्र की राजधानी काहिरा जाएंगे. काहिरा में फिलिस्तीन के एक विशेष समूह के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं, जो भविष्य में गाजा का प्रशासन संभाल सकता है. हालांकि, इस पूरे दौरे के फाइनल शेड्यूल को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है.
