जंतर-मंतर प्रोटेस्ट और 20 जुलाई को हुए संसद चलो मार्च के बाद से मामला गरमाते चला गया है. दरअसल, मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे थे, जिसकी वजह से विपक्ष के निशाने पर केंद्र सरकार आ गई है. मानसून सत्र की शुरूआत से ही विपक्ष संसद में हंगामा करते दिखाई दिया है. वह बार-बार इस मामले को उठाते दिखाई दे रहा है. इन सभी तंज का जवाब देते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी राय रखी है.
दरअसल, बुधवार को उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘युवाओं को कभी भी राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. दिल्ली में चल रहा प्रोटेस्ट काफी चिंताजनक विषय है. यह बहुत दुखद है कि लोग अपने राजनीतिक फायदों के लिए देश के युवाओं का हथियार की तरह यूज कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार छात्राओं और युवाओं की उम्मीदों के निर्माण के पूरी तरीके से प्रतिबद्ध है. छात्र समुदाय की शिकायत पर ध्यान दे रही है. छात्रों की चिंता को सुनना और उसका समाधान निकालना हमारी जिम्मेदारी बनती है. मुझे उम्मीद है कि देश का परिपक्व, जागरूक और समझदार युवा ऐसी गुमराह वाली कोशिश को समझेगा और प्रगति एवं राष्ट्र निर्माण का मुद्दा चुनेगा.’
उन्होंने इस पूरे प्रोटेस्ट को राजनीतिक साजिश करार करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति खास कर के युवाओं के साथ में किसी भी तरीके का अन्याय नहीं किया जाएगा. यह कुछ विपक्षी नेताओं की तरफ से पैदा किया गया और जानबूझकर भड़काया गया मुद्दा है. यह युवाओं को गुमराह करने की नाकाम कोशिश है. हम युवाओं की भावनाओं के प्रति संवेदनशील है. अभी के समय में संसद सत्र चल रहा है. विपक्ष संसद की बजाए सड़कों पर मुद्दे सुलझाने की कोशिश कर रहा है. यह एक गलत कोशिश है. मुद्दों पर चर्चा करने की जगह संसद है. विपक्ष अपनी राय रखने के लिए आजाद है. अगर विपक्ष सच में मामले को लेकर के गंभीर है, तो उसे मानसून के सुजारू कामकाज में बाधा नही डालना चाहिए.
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