अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) तक पहुंच गया है. मंदिर के दानपात्र से करोड़ों रुपये के चढ़ावे की हेराफेरी और मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद, राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े रहे निर्मोही अखाड़े ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दाखिल कर दी है.
राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग
निर्मोही अखाड़े द्वारा दायर की गई इस याचिका में वर्तमान ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के पुनर्गठन (Reconstitution) की पुरजोर मांग की गई है. अखाड़े का तर्क है कि चढ़ावा चोरी जैसी गंभीर घटना ने मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी कमियों को उजागर किया है, जिसके चलते वर्तमान प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करना आवश्यक हो गया है.
निरमोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास ने क्या कहा…
राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन और व्यवस्थाओं में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर निरमोही अखाड़ा की याचिका के बीच निर्मोही अखाड़ा के महंत व ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास की प्रतिक्रिया सामने आई है. निरमोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास ने कहा कि उन्हें इस याचिका की कोई जानकारी नहीं है.
ट्रस्ट को ज्यादा जवाबदेह बनाने पर जोर
याचिका में शीर्ष अदालत से यह गुहार लगाई गई है कि राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जनता व श्रद्धालुओं के प्रति पूरी तरह से जवाबदेह बनाया जाए. अखाड़े का कहना है कि दान में आने वाली पाई-पाई का सही हिसाब-किताब रखने और भविष्य में ऐसी किसी भी वित्तीय गड़बड़ी को रोकने के लिए ट्रस्ट को एक मजबूत कानूनी और प्रशासनिक ढांचे के तहत लाना बेहद जरूरी है.
आरोपियों की रिमांड और बढ़ती जांच
यह कानूनी कदम ऐसे समय में आया है जब जांच एजेंसियां इस घोटाले के मुख्य आरोपियों (टिन्नू यादव और मनीष यादव) को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर उनकी बेनामी संपत्तियों, जमीनों और ठेकेदारी फर्म से जुड़े कई बड़े राज उगलवा चुकी हैं. चढ़ावे के पैसे के इस बड़े मनी ट्रेल के खुलासे के बीच, निर्मोही अखाड़े की इस याचिका ने अब इस पूरे मामले को कानूनी और रणनीतिक रूप से एक नया और बेहद गंभीर मोड़ दे दिया है.
