Monsoon session: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले, रविवार (19 जुलाई 2026) को केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट के नेताओं को भी इस बैठक में शामिल होने का न्योता दिया गया. सरकार के इस फैसले से नाराज समूचे विपक्ष (INDIA ब्लॉक) ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया. हालांकि, कुछ मिनटों के इस प्रतीकात्मक विरोध के बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए.
विपक्ष के गुस्से का क्या था कारण?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब संसदीय कार्य मंत्री द्वारा ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) के प्रतिनिधियों को बैठक में आमंत्रित किया गया. दरअसल, यह वही गुट है जिसमें टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सांसद शामिल हुए हैं और जिन्होंने संसद में अपने लिए अलग ब्लॉक और बैठने की व्यवस्था मांगी है.
विपक्ष का मुख्य ऐतराज यह है कि इन 20 बागी सांसदों के दलबदल और विलय (Merger) को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से अभी तक कोई अंतिम या आधिकारिक फैसला नहीं आया है. टीएमसी द्वारा इन सांसदों की अयोग्यता (Disqualification) की याचिकाएं अभी भी पेंडिंग हैं. ऐसे में स्पीकर के फैसले से पहले ही सरकार द्वारा उन्हें सर्वदलीय बैठक में बुलाए जाने को विपक्ष ने ‘अलोकतांत्रिक’ और ‘असंविधानिक’ करार दिया.
महुआ मोइत्रा और जयराम रमेश ने बोला हमला
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बैठक से बाहर आकर कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी और वामदलों सहित पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर इस तानाशाहीपूर्ण रवैये का विरोध किया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला अभी लंबित है, तो किस कानूनी आधार पर इन बागी सांसदों को अलग टेबल आवंटित की गई? वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोदी सरकार द्वारा इस तथाकथित बागी गुट को आमंत्रित करना पूरी तरह गलत है. उन्होंने इसे ‘प्रतीकात्मक वॉकआउट’ बताते हुए कहा कि विपक्ष ने संविधान की गरिमा की रक्षा के लिए यह कदम उठाया.
सरकार की ओर से की गई कोशिश
इस हंगामे और संक्षिप्त वॉकआउट के बाद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं को शांत कराया और उन्हें दोबारा बैठक की मेज पर लेकर आए. सरकार का कहना है कि सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों का सहयोग जरूरी है. बहरहाल, सर्वदलीय बैठक में दिखी इस तल्खी से यह साफ हो गया है कि सोमवार (20 जुलाई 2026) से शुरू हो रहा संसद का मानसून सत्र बेहद हंगामेदार रहने वाला है.
किरेन रिजिजू ने की अपील
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और इसी को लेकर सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई गई थी. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की. रिजिजू ने कहा कि सरकार विपक्ष की बात सुनेगी और उम्मीद करती है कि विपक्ष भी सरकार की बात सुनेगा, क्योंकि संसद जितनी बेहतर चलेगी, देश को उतना ही फायदा होगा.
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